

Highlights
चंद्रकांत पाटील ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए शोध और नवाचार को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञों, प्राध्यापकों और करीब 190 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
विद्यार्थियों को क्वांटम कंप्यूटिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के लिए 6,000 करोड़ के प्रावधान का उल्लेख किया गया।
IBM Quantum Futures PulFest 2026: भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विद्यार्थियों और प्राध्यापकों को उन्नत तकनीक अपनाने के साथ शोध, नवाचार और पेटेंट पर विशेष ध्यान देना चाहिए। क्वांटम तकनीक जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। यह अपील उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने की।
वे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (बाटू), लोणेरे ( रायगड) में आयोजित ‘आईबीएम क्वांटम फ्यूचर्स पल्फेस्ट 2026’ के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे
महाराष्ट्र क्वांटम तकनीक मिशन के तहत आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञों, प्राध्यापकों और करीब 190 विद्यार्थियों ने भाग लिया है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. रजनीश कामत, प्र-कुलगुरु विनोद मोहितकर, कुलसचिव डॉ. सचिन पोरे, आईबीएम क्वांटम एंबेसडर गुंचा मलिक और नैसकॉम एआई, पुणे के अमोल महामुनी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
पाटील ने कहा कि क्वांटम तकनीक जैसे उन्नत क्षेत्रों में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को प्रयोगशालाओं में काम करने, व्यावहारिक प्रशिक्षण लेने और हैकाथॉन जैसे कार्यक्रमों में भाग लेने के अवसर मिलने चाहिए। शोध के माध्यम से नए उत्पाद विकसित करने के साथ उनके पेटेंट कराने और व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आईबीएम ने दुनिया के 160 शैक्षणिक संस्थानों में से बाटू का चयन किया है, जो विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। बाटू को शोध आधारित परिसर विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने, यहां विश्वस्तरीय प्रयोगशालाएं स्थापित करने और देश-विदेश के विद्यार्थियों को शोध के लिए आकर्षित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
पाटील ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए बैठक आयोजित करने का भी विचार है। विश्वविद्यालय के विकास के लिए सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग दिया जाएगा।
नैसकॉम एआई के अमोल महामुनी ने कहा कि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के माध्यम से भारत के पास तकनीक का केवल उपयोगकर्ता बने रहने के बजाय शोध और नवाचार में अग्रणी बनने का अवसर है। अगले आठ वर्षों के लिए छह हजार करोड़ रुपये के प्रावधान वाले इस मिशन की सफलता के लिए उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्टअप और सरकार को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि क्वांटम तकनीक, पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और कंप्यूटिंग के क्षेत्र में तेजी से नए अवसर पैदा हो रहे हैं। वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे न रहने के लिए भारत को अपनी तकनीकी क्षमता और शोध को मजबूत करना होगा।
कुलगुरु प्रो. डॉ. रजनीश कामत ने कहा कि विश्वविद्यालय में क्वांटम कंप्यूटिंग के साथ सतत विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ड्रोन, रोबोटिक्स, चिप्स, वीएलएसआई डिजाइन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी भविष्य की तकनीकों के विकास में महाराष्ट्र महत्वपूर्ण पहल कर रहा है।
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि लैपटॉप पर प्रत्यक्ष काम करने का अवसर भी मिलेगा। विश्वविद्यालय में शोध, इनक्यूबेशन सेंटर और पूर्व विद्यार्थियों के स्टार्टअप की मदद से विकास की गति और तेज होने की उम्मीद है।