

Pune Bypass Land Acquisition Increased Compensation: पुणे बाईपास मार्ग के लिए अधिग्रहित भूमि का बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों को नहीं मिलने पर सिविल कोर्ट ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। अदालत के आदेश पर 28 जुलाई को पीडब्ल्यूडी दक्षिण विभाग के कार्यालय से कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, कुर्सियां और अन्य कार्यालयी उपकरण जब्त किए गए। यह कार्रवाई कोर्ट के कर्मचारियों की मौजूदगी में कार्यकारी अभियंता अनुराधा भंडारे के कार्यालय में की गई।
बाईपास परियोजना के लिए वडकी, लोणी कालभोर और कुंजीरवाड़ी के किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई थी। मुआवजा कम मिलने पर किसानों ने अधिवक्ता विलास कुलकर्णी और रितेश कुलकर्णी के माध्यम से सिविल कोर्ट में याचिका दायर की।
सुनवाई के बाद अदालत ने जिरायत भूमि के लिए 1.29 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर, मौसमी बागवानी भूमि के लिए 1.94 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर और बारहमासी बागवानी भूमि के लिए 2.59 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से बढ़ा हुआ मुआवजा देने का आदेश दिया।
बढ़े हुए मुआवजे के भुगतान के लिए किसानों ने कुल 18 निष्पादन आवेदन दायर किए थे। आदेश का पालन नहीं होने पर 16 जून 2025 को सिविल कोर्ट ने 12 मामलों में जब्ती वारंट जारी किया।
इसके बाद 17 फरवरी को भी अदालत का दल कार्रवाई के लिए पीडब्ल्यूडी कार्यालय पहुंचा था। उस समय विभाग ने भुगतान का आश्वासन दिया था, लेकिन निर्धारित अवधि में राशि जारी नहीं की गई।
भुगतान नहीं होने पर अदालत ने दूसरी बार जब्ती की कार्रवाई का आदेश दिया। कोर्ट के बेलिफ तेजस लिंगायत और शिवाजी पराडे ने यह कार्रवाई पूरी की। इस दौरान अधिवक्ता पल्लवी नांदवटे-होडगे, मयूरी शाह, माधवी वायदंडे और उमेश गाडे भी मौजूद रहे। कार्रवाई के दौरान कार्यालय से 15 से अधिक कंप्यूटर, 30 से अधिक कुर्सियां, 15 से अधिक प्रिंटर एवं स्कैनर और 7 एयर कूलर जब्त किए गए।
किसानों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता रितेश कुलकर्णी ने कहा कि अदालत द्वारा स्वीकृत पूरा मुआवजा किसानों को मिलने के बाद ही जब्त किया गया सामान वापस किया जाएगा। उन्होंने मांग की कि पीडब्ल्यूडी जल्द से जल्द अदालत के आदेश का पालन करते हुए किसानों को उनका बढ़ा हुआ मुआवजा दे, ताकि लंबे समय से लंबित यह विवाद समाप्त हो सके।