फ्री में प्लांट लगाने को तैयार कंपनी, फिर भी फाइल आगे नहीं बढ़ी? पुणे के उरुली देवाची कचरा डिपो प्रोजेक्ट अटका

BPCL 300 Ton Bio CNG Project Proposal Pending: पुणे में रोज 1,100 टन गीले कचरे के बीच BPCL का 300 टन बायो-CNG प्रोजेक्ट अटका। उरुली देवाची में 12 एकड़ जमीन पर प्रस्ताव विशेष सभा के हवाले।
Pune BPCL Bio CNG
पुणे में ट्रैफिक दबाव(सोर्स सोशल मीडिया)
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Uruli Devachi 12 Acre Land For Bio CNG Plant: पुणे शहर में लगातार बढ़ रही गीले कचरे की समस्या के बीच भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के 300 टन क्षमता वाले बायो-CNG प्रोजेक्ट पर फिलहाल फैसला टल गया है।

BPCL ने उरुली देवाची कचरा डिपो परिसर में यह प्रोजेक्ट स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। कंपनी निर्माण से लेकर अगले 25 वर्षों तक संयंत्र के संचालन और रखरखाव का खर्च खुद उठाने को तैयार है। इसके बावजूद मनपा की स्थायी समिति ने प्रस्ताव को सीधे मंजूरी देने के बजाय विशेष सभा में चर्चा के लिए भेज दिया है। इस फैसले के बाद परियोजना को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है।

रोज निकलता है करीब 1,100 टन गीला कचरा

प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार पुणे में प्रतिदिन करीब 1,100 टन गीला कचरा उत्पन्न होता है। महानगर पालिका के पास फिलहाल करीब 395 टन कचरे की प्रक्रिया करने की क्षमता है।

करीब 600 टन गीला कचरा किसानों को दिया जाता है। इसके बावजूद लगभग 125 टन कचरा प्रतिदिन शेष रह जाता है। ऐसे में गीले कचरे की प्रक्रिया क्षमता बढ़ाने के लिए नए प्रोजेक्ट की जरूरत बताई जा रही है।

12 एकड़ जमीन पर लगना है संयंत्र

BPCL का प्रस्तावित प्रोजेक्ट उरुली देवाची में मनपा की 12 एकड़ जमीन पर स्थापित किया जाना है। कंपनी संयंत्र के निर्माण के साथ अगले 25 वर्षों तक उसके संचालन और रखरखाव का पूरा खर्च उठाएगी।

इसके बदले मनपा कंपनी को जमीन एक रुपये प्रति एकड़ प्रतिवर्ष के नाममात्र किराये पर उपलब्ध कराएगी। हालांकि, सड़क निर्माण और बिजली कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मनपा की होगी।

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500 टन क्षमता का एक अन्य प्रोजेक्ट भी मंजूर

उरुली देवाची कचरा डिपो की जमीन पर मनपा ने हाल ही में भूमि ग्रीन कंपनी के माध्यम से 500 टन क्षमता का एक अन्य प्रोजेक्ट मंजूर किया है। इस परियोजना पर करीब 577 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इसके अलावा शहर के बाहर 300 टन गीला कचरा ले जाकर उससे सीबीजी बनाने के लिए मनपा ने अलग निविदा जारी की है।

परिवहन और प्रक्रिया पर 765 करोड़ से अधिक का अनुमान

इस निविदा में स्वयंभू ट्रांसपोर्ट ने शुरुआत में 2,090 रुपये प्रति टन की दर प्रस्तावित की थी। मनपा द्वारा दर अधिक बताए जाने के बाद इसे घटाकर 1,705 रुपये प्रति टन किया गया।

हर वर्ष सात प्रतिशत की वृद्धि को ध्यान में रखते हुए अगले 20 वर्षों में कचरे के परिवहन और प्रक्रिया पर करीब 765 करोड़ 38 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।

ऐसे में एक ओर शहर में गीले कचरे की मात्रा लगातार चुनौती बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर उसके निपटारे के लिए प्रस्तावित विभिन्न परियोजनाओं पर निर्णय और उनकी लागत को लेकर मनपा के स्तर पर चर्चा जारी है।

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