बारामती नगर परिषद ने बंद किए दो साप्ताहिक बाजार, किसानों-व्यापारियों में भारी आक्रोश, उग्र आंदोलन की चेतावनी

Baramati Market Controversy: बारामती नगर परिषद द्वारा गणेश मंडई व सूर्यनगरी के दो साप्ताहिक बाजार बंद करने से किसानों व छोटे व्यापारियों में आक्रोश व्याप्त है। राजनीतिक दलों ने आंदोलन की चेतावनी दी।
Baramati Municipal Council shuts down two weekly markets; massive outrage among farmers and traders
बारामती नगर परिषद सोर्स- सोशल मीडिया
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Baramati Municipal Council Weekly Market Closure Controversy: बारामती नगर परिषद ने गणेश मंडई के गुरुवार और सूर्यनगरी के रविवार के साप्ताहिक बाजार को बंद करने का फैसला लिया है। 12 जून को पारित प्रस्ताव के आधार पर 20 सितंबर से इस निर्णय को लागू किया गया है। इस फैसले से किसानों, छोटे सब्जी विक्रेताओं और आम नागरिकों में भारी नाराजगी है।

प्रशासन ने नियम का उल्लंघन करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं राजनीतिक दलों और किसान संगठनों ने फैसला वापस न लेने पर जनआंदोलन की चेतावनी दी है। नगरसेवक प्रवीण माने और मुख्याधिकारी पंकज भुसे ने यातायात, स्वच्छता और बच्चों की सुरक्षा के आधार पर इस फैसले को जायज ठहराया है।

फैसला वापस लेने की मांग

बारामती नगर परिषद के इस फैसले से स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है। बारामती शहर का विस्तार और आबादी तेजी से बढ़ने के कारण ये बाजार बहुत महत्वपूर्ण हैं।

गणेश मंडई का बाजार आसपास के कई गांवों के किसानों के लिए बिक्री का मुख्य केंद्र है। सूर्यनगरी के रविवार बाजार में भी हजारों लोग खरीदारी के लिए आते हैं। लोग इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन की कार्रवाई और सख्त निर्देश

नगर परिषद ने 12 जून को प्रस्ताव पारित कर इन बाजारों को बंद करने का निर्णय लिया था। प्रशासन ने 20 सितंबर से इसे लागू कर आगामी गुरुवार से बाजार न लगाने के निर्देश दिए हैं।

नियम तोड़कर सामान बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। इस सख्ती से छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों के सामने संकट खड़ा हो गया है।

आजीविका और किसानों पर पड़ेगा असर

साप्ताहिक बाजार बंद होने से किसानों का सीधा संपर्क ग्राहकों से पूरी तरह टूट जाएगा। इससे व्यापार में मध्यस्थों और बिचौलियों का हस्तक्षेप काफी बढ़ जाएगा।

इस बाजार पर सैकड़ों परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर निर्भर है। हर सप्ताह होने वाले बड़े व्यापार के रुकने से छोटे व्यापारियों और आम ग्राहकों दोनों को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा।

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बाजार का ऐतिहासिक महत्व और विरोध

इस बाजार का एक विशेष सामाजिक और राजनीतिक इतिहास भी रहा है। वरिष्ठ नेता शरद पवार ने अपने शुरुआती दिनों में इसी बाजार में सब्जी बेची थी।

मनसे नेता एड सुधीर पाटसकर, भाजपा के सचिन साबले, किसान संगठन के अमरसिंह कदम और सामाजिक कार्यकर्ता विष्णुपंत चव्हाण ने इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का पक्ष

स्थानीय नगरसेवक प्रवीण माने ने कहा कि यह निर्णय किसी व्यवसाय के विरोध में नहीं लिया गया है। यातायात, स्वच्छता, पार्किंग और पास के आंगनवाड़ी बच्चों की परेशानी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। बारामती नगर परिषद के मुख्याधिकारी पंकज भुसे ने स्पष्ट किया कि सर्वसाधारण सभा के प्रस्ताव के अनुसार ही सड़कों पर बिक्री से होने वाली असुविधा को रोका जाएगा।

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