Ajit Pawar के निधन के बाद बदला पुणे की राजनीति का मिजाज, NCP ने बदली चुनावी रणनीति
Deputy CM Ajit Pawar के आकस्मिक निधन से पुणे जिले का चुनावी माहौल शोक में बदल गया। सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण के बाद NCP ने शांत और सीमित प्रचार की नई रणनीति अपनाई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे जिला परिषद (सौ. सोशल मीडिया )
Zilla Parishad Election In Pune: उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद पुणे जिले की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों की तैयारियों के बीच यह त्रासदी राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं के लिए गहरे सदमे का कारण बनी। चुनावी सरगर्मियां जहां तेज होने वाली थीं, वहीं पूरे जिले में शोक का माहौल छा गया।
चुनावी प्रचार पर लगा ब्रेक
अजित पवार के निधन के बाद कुछ दिनों तक चुनावी प्रचार लगभग ठप रहा। पोस्टर, सभाएं और जनसभाओं की गूंज अचानक शांत हो गई। राजनीतिक दलों ने भी हालात को देखते हुए अपने कार्यक्रम सीमित कर दिए। जिले में आगामी 7 फरवरी को मतदान होना है, लेकिन समय नजदीक होने के बावजूद चुनावी शोर नजर नहीं आ रहा।
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सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण के बाद नई रणनीति
शनिवार को सुनेत्रा पवार द्वारा उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने नई रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया है। पार्टी अब अजित पवार के पुराने भाषणों और उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों के वीडियो के जरिए मतदाताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाने पर जोर दे रही है।
शांत प्रचार पर जोर, शक्ति प्रदर्शन से दूरी
राष्ट्रवादी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजेंद्र कोरेकर ने स्पष्ट किया कि पार्टी गहरे शोक में है। ऐसे में किसी भी तरह के शक्ति प्रदर्शन, बड़ी सभाओं, पटाखों या बैंड-बाजे का उपयोग नहीं किया जाएगा। उम्मीदवारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल घर-घर जाकर व्यक्तिगत जनसंपर्क करें और पर्चों के माध्यम से अपनी बात रखें।
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भावनाओं और जिम्मेदारी के बीच चुनाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार पुणे जिले के चुनाव भावनात्मक माहौल में होंगे। अजित पवार की विरासत और उनके विकास कार्य चुनावी मुद्दों का केंद्र बन सकते हैं। शोक और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी के बीच यह चुनाव जिले की राजनीति के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
