UAE से भारत लाया गया भगोड़ा अविनाश राठौड़, 88 करोड़ की ठगी का है मास्टरमाइंड, पुणे पुलिस की बड़ी कामयाबी

Pune Investment Scam: पुणे पुलिस की EOW ने 88 करोड़ रुपये की ठगी के मुख्य आरोपी अविनाश राठौड़ को UAE से प्रत्यर्पित कर गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट ने आरोपी को 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा।
Pune Investment Scam Mastermind Avinash Rathod Extradited From UAE
UAE से भारत लाया गया भगोड़ा अविनाश राठौड़ (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Pune Investment Scam Mastermind Extradited From UAE: अधिक मुनाफे और आकर्षक रिटर्न का लालच देकर सैकड़ों निवेशकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एपीएस वेल्थ वेंचर्स एलएलपी के मुख्य आरोपी अविनाश अर्जुन राठौड़ को आखिर कानूनी शिकंजे में ले लिया गया है। पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन के तहत उसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से प्रत्यर्पित कराकर भारत लाते ही मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया।

88 करोड़ रुपये की महा-ठगी और भगोड़ा घोषित

करीब 88 करोड़ रुपये के इस हाई-प्रोफाइल निवेश घोटाले का मुख्य आरोपी अविनाश राठौड़ लंबे समय से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। भारत लाए जाने के बाद पुणे पुलिस ने उसे विशेष अदालत में पेश किया, जहां से न्यायाधीश ने मामले की गहन पूछताछ के लिए आरोपी को 10 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया है।

साल 2023 में दर्ज हुई थी शिकायत

पुणे पुलिस के अनुसार, इस मामले में चतुःश्रृंगी पुलिस स्टेशन में वर्ष 2023 में मामला दर्ज किया गया था। शिकायत 20 अप्रैल 2023 को दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद जांच आर्थिक अपराध शाखा, पुणे शहर को सौंपी गई।

जांच में सामने आया कि बाणेर स्थित एपीएस वेल्थ वेंचर्स एलएलपी के संचालक अविनाश अर्जुन राठौड़ और उनकी पत्नी विशाखा अविनाश राठौड़ ने निवेशकों को कम समय में अधिक और आकर्षक रिटर्न देने का वादा किया। लोगों से औपचारिक निवेश समझौते किए गए, लेकिन बाद में उन समझौतों का पालन नहीं किया गया और निवेशकों की रकम वापस नहीं की गई।

शुरुआती शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने उनसे 86 लाख 37 हजार 500 रुपये का निवेश कराया और कम समय में मोटा रिटर्न देने का वादा किया। हालांकि, समय पूरा होने पर न तो कोई मुनाफा दिया गया और न ही मूल रकम लौटाई गई।

इस मामले की जांच शुरू होने के बाद सामने आया कि ठगी केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थी, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों से इसी तरह निवेश कराया गया। जांच में पता चला कि लगभग 88 करोड़ रुपये की विशाल रकम सैकड़ों निवेशकों से हड़पी गई थी।

लुकआउट सर्कुलर से रेड कॉर्नर नोटिस तक का सफर

पुणे पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद अविनाश और उसकी पत्नी विशाखा फरार हो गए। पुलिस को आशंका थी कि दोनों देश छोड़कर विदेश भाग सकते हैं। इसी को देखते हुए 24 अप्रैल 2024 को दोनों आरोपियों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया, ताकि वे भारत से बाहर न जा सकें या विदेश से लौटते ही गिरफ्तार किए जा सकें।

इसके बाद पुणे के विशेष एमपीआईडी न्यायालय, शिवाजीनगर ने दोनों आरोपियों के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया। साथ ही भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में दोषारोप पत्र भी दाखिल किया और उनके पासपोर्ट निलंबित कर दिए गए।

देशभर में तलाश के बावजूद सफलता नहीं मिलने पर पुणे पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद ली। 4 जून 2026 को दोनों आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया। इसके आधार पर यूएई की संबंधित एजेंसियों ने अविनाश अर्जुन राठौड़ को हिरासत में लिया और 23 जुलाई 2026 को आरोपी को भारत प्रत्यर्पित किया गया।

पुणे पुलिस ने मुंबई एयरपोर्ट पर किया गिरफ्तार

मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। इसके बाद आरोपी को पुणे लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां न्यायालय ने विस्तृत पूछताछ के लिए 10 दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की।

अब शुरू होगी पैसों की रिकवरी और नेटवर्क की जांच

आर्थिक अपराध शाखा अब यह पता लगाने में जुटी है कि निवेशकों से जुटाए गए 88 करोड़ रुपये कहां और किस तरह खर्च किए गए। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे, कितनी संपत्तियां खरीदी गईं, रकम विदेश भेजी गई या नहीं तथा अन्य सहयोगियों की भूमिका क्या रही।

जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी से पूछताछ में कथित ठगी के पूरे नेटवर्क और निवेशकों के पैसे के प्रवाह से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। पुणे पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकरण में जो अन्य आरोपी अभी भी विदेशों में छिपे हुए हैं, उन्हें भी कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत लाने की कार्रवाई युद्धस्तर पर जारी है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।

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