Vasai Virar Water Crisis: पानी की किल्लत के बीच कार वॉश सेंटरों पर सवाल, ठाणे जैसी सख्ती की मांग तेज

Vasai Virar Water Crisis के बीच सैकड़ों ऑटो सर्विस सेंटरों पर लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। भूजल दोहन और प्रदूषण को लेकर प्रशासन की निष्क्रियता पर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
Vasai Virar Water Crisis News
वसई विरार में जलसंकट के बीच कार वॉश सेंटरों पर सवाल (सौ. सोशल मीडिया )
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Vasai Virar Water Crisis News: वसई-विरार में सूरज के तीखे तेवर और गहराते जल संकट ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

एक तरफ जहां डैम का जलस्तर नीचे जा रहा है और बोरवेल जवाब दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर के सैकड़ों ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटरों पर रोजाना लाखों लीटर पानी बहाया जा रहा है।

ठाणे महानगरपालिका द्वारा जल संरक्षण के लिए उठाए गए कड़े कदमों के बाद अब वसई-विरार महानगरपालिका से भी वैसी ही सख्ती की मांग की जा रही है। वसई विरार के इलाकों में वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ ही गली-मोहल्लों में 300 से 350 सर्विस सेंटर कुकुरमुत्ते की तरह उग आए हैं।

ठाणे मनपा से सीखे वसई-विरार महानगरपालिका

इन केंद्रों की हकीकत बेहद डरावनी है निजी कुओं और बोरवेल के जरिए धड़ल्ले से भूजल निकाला जा रहा है। विडंबना यह है कि इनमें से अधिकांश केंद्रों पर पानी के पुनर्चक्रण की कोई व्यवस्था नहीं है। पीने योग्य मीठा पानी और भूजल वाहनों को चमकाने के नाम पर सीधे गंदे नालों में बहा दिया जा रहा है।

पड़ोसी शहर ठाणे में जल संकट की भयावहता को देखते हुए ठाणे महानगरपालिका ने सर्विस सेंटरों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके विपरीत, वसई-विरार महापालिका प्रशासन अब तक कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। सूत्रों की मानें तो अब तक इस गंभीर मुद्दे पर न तो कोई ठोस कार्य योजना बनी है और न ही अधिकारियों ने कोई बैठक की है। प्रशासन की इस 'ढीली नीति' के कारण जनता में भारी रोष व्याप्त है।

जब पीने के पानी के लिए लोग बूंद-बूंद को तरस रहे हैं, तब वाहनों को चमकाने के लिए लाखों लीटर पानी बर्बाद करना किसी अपराध से कम नहीं है। महानगरपालिका को तत्काल प्रभाव से सर्विस सेंटरों पर प्रतिबंध - लगाना चाहिए।

-शिवम सिंह, स्थानीय निवासी

पर्यावरण पर केमिकल, ग्रीस और तेल से हो रहा प्रहार

यह केवल पानी की बर्बादी का मामला नहीं है, बल्कि प्रदूषण का दोहरा वार है। वाहनों की धुलाई में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक केमिकल्स, ग्रीस और तेल युक्त पानी सीधे जमीन के भीतर जा रहा है। जिससे भविष्य में रहा-सहा भूजल भी जहरीला होने का खतरा बढ़ गया है।

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