पालघर रिलीफ अस्पताल हिंसा मामला: विधायक के बेटे रोहित गावित सहित 22 आरोपी 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में

Palghar Relief Hospital News: पालघर रिलीफ अस्पताल में हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में अदालत ने विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित समेत 22 आरोपियों को 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
Palghar Relief Hospital violence case: MLA's son Rohit in police custody
पालघर रिलीफ अस्पताल हिंसा मामला सोर्स- सोशल मीडिया
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Palghar Relief Hospital Attack: पालघर के रीलिफ हॉस्पिटल में हुई हिंसा के मामले में अदालत ने विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित समेत 22 आरोपियों को 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

गिरफ्तार आरोपियों में शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख कुंदन सांखे भी शामिल हैं। मजिस्ट्रेट योगेश एच. गजभिये ने रविवार देर रात सुनवाई के बाद आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

अस्पताल में घुसकर हिंसा और तोड़फोड़ का आरोप

पुलिस के अनुसार, 5 सितंबर की देर रात शिवसेना के कुछ कार्यकर्ता पालघर शहर स्थित रीलिफ हॉस्पिटल में घुस गए थे।

उस समय अस्पताल में दही हांडी समारोह के दौरान घायल हुए कुछ गोविंदाओं का इलाज चल रहा था। आरोप है कि कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में तोड़फोड़ की, डॉक्टर को धमकी दी और कर्मचारियों के साथ मारपीट की।

घायल मरीज को ICU से बाहर ले जाने का आरोप

पुलिस ने आरोप लगाया है कि हिंसा के दौरान एक घायल व्यक्ति को कथित तौर पर ICU से जबरन बाहर ले जाया गया।

आरोपियों की ओर से दावा किया गया कि अस्पताल मरीजों से अत्यधिक शुल्क वसूल रहा था। हालांकि, पुलिस मामले में हिंसा, तोड़फोड़ और कथित जबरन मरीज को बाहर ले जाने के आरोपों की जांच कर रही है।

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CCTV फुटेज से आरोपियों की पहचान

पालघर पुलिस ने अस्पताल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज के आधार पर 22 आरोपियों की पहचान की। शिवसेना की पालघर शहर इकाई के प्रमुख राहुल घरात को 7 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।

इसके अलावा रोहित गावित और 12 गोविंदाओं को भी गिरफ्तार किया गया है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

अभियोजन ने मांगी पांच दिन की हिरासत

अभियोजन पक्ष की ओर से उप-मंडलीय पुलिस अधिकारी निशा जाधव ने अदालत से आरोपियों की पांच दिन की पुलिस हिरासत की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपियों का पक्ष रखते हुए कहा कि वे किसी गैरकानूनी इरादे से अस्पताल नहीं गए थे, बल्कि घायल मित्र से मिलने पहुंचे थे।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सभी 22 आरोपियों को 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। पुलिस अब मामले में CCTV फुटेज, अस्पताल परिसर में हुई घटना और आरोपियों की कथित भूमिका से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है।

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