

Palghar Hospital Attack Relief Hospital Vandalism: पालघर के एक निजी अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मचारियों पर हमले तथा तोड़फोड़ के मामले में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर मुंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को पुलिस को कड़ी फटकार लगाई।
न्यायमूर्ति ए।एस। गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने कहा कि मामले में पुलिस की जांच बेहद लापरवाह रही है और यह 'अस्वीकार्य' है।
पालघर के पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख ने अदालत को बताया कि एफआईआर में नामजद 10 आरोपियों में से शिवसेना के पालघर शहर प्रमुख राहुल घरात को गिरफ्तार किया जा चुका है और वह पुलिस हिरासत में है। बाकी नौ आरोपी अब भी फरार हैं। पीठ ने सवाल किया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने तत्काल कदम क्यों नहीं उठाए।
एफआईआर दर्ज होने के बाद ऐसा लगता है कि कोई जांच ही नहीं की गई। पुलिस की लापरवाही के कारण आरोपी फरार हैं। पीठ ने यह भी पूछा कि पुलिस के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष क्यों न निकाला जाए।
घटना 5 और 6 सितंबर की दरमियानी रात पालघर के रिलीफ अस्पताल में हुई थी। आरोप है कि दही-हांडी समारोह में घायल होकर भर्ती कुछ गोविंदाओं के इलाज के दौरान शिवसेना के कई कार्यकर्ता अस्पताल में पहुंचे।
अधिक पैसे वसूलने का आरोप लगाते हुए कथित तौर पर अस्पताल में तोड़फोड़ की गई, डॉक्टरों को धमकाया गया और कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई आरोप यह भी है कि आईसीयू में भर्ती घायल लोगों को जबरन अस्पताल से ले जाया गया।
पीठ ने जुलाई में ठाणे शहर के सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों के साथ हुई मारपीट की घटना का भी उल्लेख किया। अदालत ने सवाल किया कि क्या पुलिस ने उस घटना से कोई सबक नहीं सीखा। उस मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे आरोपी है।
पीठ ने कहा कि अस्पताल में तोड़फोड़, कर्मचारियों से मारपीट और डॉक्टरों को धमकी देना गंभीर और संवेदनशील मामला है। पुलिस का रवैया मामले में बेहद लापरवाही भरा रहा है और 'यह मंजूर नहीं है।