

अजित पवार के निधन के बाद NCP में वर्चस्व की जंग।
पार्थ पवार और प्रफुल पटेल गुट के बीच तनातनी बढ़ गई है।
देवगिरी आवास पर हुई बैठक से 17 विधायकों ने दूरी बनाई।
Parth Pawar Vs Praful Patel: महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री व एनसीपी के दिवंगत नेता अजित पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में घमासान मचा हुआ है। अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है, लेकिन अब पार्टी में वर्चस्व को लेकर पार्थ पवार और प्रफुल पटेल गुट आमने-सामने हैं।
दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में पार्टी के भीतर सत्ता के नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों और आंतरिक मतभेदों की अटकलों के बीच एनसीपी ने तीन दिन में दूसरी बार कोर कमेटी की बैठक बुलाई।
बुधवार सुबह हुई इस बैठक में पार्टी प्रमुख एवं उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार भी शामिल हुईं। लगातार हो रही बैठकों को पार्टी की भावी राजनीतिक रणनीति और महायुति में अपनी भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पार्टी के अंदर चल रहे कलह को खत्म करने के लिए NCP अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने देवगिरी निवास पर सभी विधायकों की बैठक बुलाई थी, लेकिन 17 विधायकों ने इस बैठक से कन्नी काट ली। इससे पार्टी की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है।
इधर NCP के कुछ सीनियर नेता प्रफुल पटेल व सुनील तटकरे के रवैए को देख कर पार्थ गुट के तेवर बिगड़े हुए हैं। पार्थ अपने सीनियर नेताओं से इस बात को लेकर नाराज हैं कि उन्होंने डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार के बिना केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मुलाकात क्यों की।
पार्थ ने कहा है कि सभी को पार्टी अध्यक्ष के आदेश के अनुसार ही चलना होगा। जबकि सीनियर नेताओं ने कहा है कि बिना कोर कमेटी की बैठक के बिना पार्टी के बड़े फैसले नहीं लिए जाने चाहिए।
पार्थ पवार ने हाल ही में जीशान सिद्दीकी को NCP का मुंबई अध्यक्ष व उमेश पाटिल को राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया है। प्रफुल पटेल गुट का आरोप है कि इस अपॉइंटमेंट में कोर कमेटी को विश्वास में नहीं लिया गया। लेकिन पार्थ पवार ने साफ किया है कि दोनों नेता अगले छह महीने काम करेंगे। उनके काम की समीक्षा के बाद आगे के फैसले लिए जाएंगे।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए बुधवार की सुबह कोर कमेटी की बैठक हुई। इस बैठक में एक बार फिर सुनेत्रा पवार ने अपने नेताओं से पार्टी हित को ध्यान में रखते हुए काम करने का आवाहन किया है।
रविवार को NCP के वरिष्ठ नेताओं प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे, दिलीप वलसे पाटिल, हसन मुशरिफ, छगन भुजबल और धनंजय मुंडे ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस बैठक में सुनेत्रा पवार और उनके दोनों बेटों पार्थ तथा जय की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी।
खासकर पार्टी के भीतर नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे। इसके बाद सोमवार को मुंबई में कोर कमेटी की बैठक हुई और मंगलवार को विधायकों को एकजुट करने के लिए सुनेत्रा पवार ने अपने सरकारी आवास देवगिरी में बैठक बुलाई।
मंगलवार की बैठक में मंत्रियों सहित करीब 50 विधायक और सुनेत्रा पवार के दोनों बेटे शामिल हुए। बैठक के बाद मुंबई एनसीपी अध्यक्ष जीशान सिद्दीकी ने दावा किया कि सभी विधायकों, मंत्रियों और पदाधिकारियों ने एकमत से सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में भरोसा जताया है। सुनेत्रा पवार ने भी 2029 के चुनाव में पार्टी को पहले से अधिक सीटें मिलने का विश्वास जताया। इसे पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, पार्टी नेताओं ने सुनेत्रा पवार और उनके बेटों को किनारे किए जाने की चर्चाओं को खारिज किया है। शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के साथ विलय की अटकलों को भी निराधार बताया गया है। नेताओं का कहना है कि अमित शाह के साथ बैठक का उद्देश्य महायुति के घटक दलों के बीच समन्वय बेहतर करना था।
बता दें कि जुलाई 2023 में अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से बगावत कर पार्टी को दो गुटों में तोड़ दिया था। अजित पवार एक गुट के साथ महायुति सरकार में शामिल हो गए, जिससे एनसीपी दो गुटों में बंट गई थी। नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद भी अजित पवार उपमुख्यमंत्री बने रहे।
जनवरी 2026 में बारामती में हुए विमान हादसे में अजित पवार का निधन हो गया। उनके निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने पार्टी प्रमुख और उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली। अब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली में सक्रियता, लगातार हो रही कोर कमेटी की बैठकें और विधायकों को एकजुट रखने की कवायद ने एनसीपी की आगे की राजनीतिक दिशा को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
सवाल यह है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी महायुति में अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रभाव किस तरह बनाए रखेगी तथा अजीत पवार के बाद बने नेतृत्व के समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।