

School Students Educational Visit: नासिक के येवला स्थित विद्या इंटरनेशनल स्कूल की कक्षा 3 और 4 के विद्यार्थियों ने कापसे फाउंडेशन का शैक्षणिक दौरा कर अनुभवात्मक शिक्षा का अनूठा अनुभव प्राप्त किया। इस यात्रा का उद्देश्य बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़ाकर भारतीय संस्कृति, ग्रामीण जीवन, पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक उद्योगों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना था।
दौरे के दौरान विद्यार्थियों ने पैठणी हथकरघा विभाग का भ्रमण किया और महाराष्ट्र की प्रसिद्ध पारंपरिक पैठणी साड़ी के निर्माण की पूरी प्रक्रिया को करीब से देखा। विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि किस प्रकार साधारण धागों को रंगाई, बुनाई और महीन कारीगरी के माध्यम से आकर्षक पैठणी साड़ी का रूप दिया जाता है। विद्यार्थियों ने बुनकरों के धैर्य, कौशल और मेहनत को नजदीक से समझा तथा भारतीय हस्तकला की समृद्ध परंपरा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। इस अनुभव ने बच्चों में पारंपरिक कला और स्थानीय कारीगरों के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत किया।
शैक्षणिक यात्रा के दूसरे चरण में विद्यार्थियों ने कापसे फाउंडेशन की गोशाला का दौरा किया। यहां उन्हें गायों के पालन-पोषण, उनके दैनिक प्रबंधन, जैविक खेती में गोवंश की उपयोगिता तथा पर्यावरण संरक्षण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में विस्तार से बताया गया। बच्चों ने जाना कि प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गोवंश का कितना महत्वपूर्ण स्थान है। इस दौरान गाय के गोबर से पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमा बनाने का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया।
विशेषज्ञों ने गोबर के शुद्धिकरण, उसे गूंथने, सांचे की सहायता से प्रतिमा तैयार करने तथा प्राकृतिक रूप से सुखाने की पूरी प्रक्रिया समझाई। विद्यार्थियों ने इस गतिविधि में उत्साहपूर्वक रुचि दिखाई और पर्यावरण संरक्षण के लिए इको-फ्रेंडली विकल्प अपनाने का संदेश भी ग्रहण किया। इस पूरे शैक्षणिक दौरे का नियोजन गतिविधि विभाग प्रमुख स्वप्निल थोरात और संस्कृति सरोदे ने किया, जबकि सहायक शिक्षिका रिया पटेल और धनश्री कमोदकर ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
विद्यालय के संस्थापक डॉ. राजेश पटेल और डॉ. संगीता पटेल ने इस शैक्षणिक पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बताया कि केवल कक्षा में पढ़ाई तक सीमित रहने के बजाय बच्चों को वास्तविक जीवन से जुड़े अनुभव देना आज की शिक्षा की आवश्यकता है। इस प्रकार के भ्रमण से विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति के प्रति गर्व, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी, ग्रामीण जीवन की समझ और पारंपरिक उद्योगों के प्रति सम्मान विकसित होता है।
साथ ही उनमें सामाजिक संवेदनशीलता, प्रकृति के प्रति प्रेम और सतत विकास की भावना भी मजबूत होती है। विद्यालय भविष्य में भी विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, व्यावहारिक ज्ञान और जीवन मूल्यों को समृद्ध बनाने के उद्देश्य से ऐसे शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, ताकि बच्चे बेहतर नागरिक बनने के साथ-साथ समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझ सकें।