नासिक विधान परिषद चुनाव में महायुति का पलड़ा भारी: सीटों को लेकर रस्साकशी तेज, स्थानीय नगरसेवक नाराज

Nashik Vidhan Parishad: नासिक विधान परिषद चुनाव में 468 वोटों के साथ महायुति की जीत तय मानी जा रही है। हालांकि, निर्विरोध या एकतरफा चुनाव की संभावना से स्थानीय नगरसेवकों में नाराजगी है।
With 468 votes, the Mahayuti alliance holds a clear edge in the Nashik MLC election, though talks of an unopposed contest have sparked discontent among local councillors.
नासिक विधान परिषद चुनाव (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Nashik Vidhan Parishad Mahayuti Election: नासिक स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र से होने वाले विधान परिषद चुनाव को लेकर महायुति के तीनों प्रमुख दलों के बीच दावेदारी तेज होने से राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस के बीच सीट को लेकर रस्साकशी चल रही है, जिससे उम्मीदवार चयन को लेकर पेच पैदा हो गया है। हालांकि, वरिष्ठ स्तर पर महायुति के एकजुट होकर चुनाव लड़ने के संकेत मिलने से स्थानीय नगरसेवकों में नाराजगी का माहौल दिखाई दे रहा है। इस निर्वाचन क्षेत्र में मनपा, नगरपालिका और नगर पंचायतों के निर्वाचित नगरसेवक ही मतदाता होते हैं। इसलिए हर वोट की अहमियत काफी बढ़ जाती है।

कई नगरसेवकों ने स्थानीय चुनावों में भारी आर्थिक खर्च किया था और उन्हें उम्मीद थी कि विधान परिषद चुनाव में उनकी राजनीतिक और आर्थिक अहमियत बढ़ेगी, लेकिन यदि महायुति एकमत से उम्मीदवार तय कर चुनाव को निर्विरोध या एकतरफा बनाने की कोशिश करती है, तो नगरसेवकों की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है।

खास बात यह है कि इस निर्वाचन क्षेत्र में विपक्ष की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही है। ठाकरे गुट, राष्ट्रवादी कांग्रेस शरद पवार गुट और कांग्रेस के नगरसेवकों की संख्या सीमित है। मालेगांव क्षेत्र में इस्लाम पार्टी और एआईएमआईएम के कुछ सदस्य जरूर हैं, लेकिन उनकी संख्या निर्णायक नहीं मानी जा रही। ऐसे में महायुति यदि एकजुट होकर चुनाव लड़ती है, तो उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।

वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद अंतिम फैसला

इसी पृष्ठभूमि में नगरसेवकों के बीच असंतोष बढ़ने लगा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब चुनाव मुकाबले वाला होता है, तब नगरसेवकों का महत्व बढ़ जाता है, विभिन्न गुट उनसे संपर्क साधते है और उनका राजनीतिक 'भाव' भी बढ़ता है, लेकिन यदि चुनाव एकतरफा हो गया, तो उनकी भूमिका केवल मतदान तक सीमित रह जाएगी। फिलहाल नासिक महायुति में सीट बंटवारे को लेकर अंतिम फैसला वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद होने की संभावना है। किस दल को उम्मीदवार बनाया जाएगा, इस पर पूरे जिले की नजर टिकी हुई है।

स्थानीय स्तर पर दावेदारों की संख्या बढ़ने से आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने के संकेत मिल रहे है। नासिक जिले के इस निर्वाचन क्षेत्र में महानगरपालिका, नगरपालिका और नगर पंचायतों के कुल 623 नगरसेवक मतदाता है। इनमें भाजपा के पास 190, शिंदे गुट के पास 171 और अजित पवार गुट के पास 107 वोट है।

इस तरह महायुति की कुल मतसंख्या 468 तक पहुंचती है। दूसरी ओर विपक्षी खेमे में ठाकरे गुट के पास 45, कांग्रेस के पास 13, इस्लाम पार्टी के पास 35, एआईएमआईएम के पास 21 और अन्य के पास 41 वोट है। यानी विपक्ष के पास कुल 155 वोट ही हैं। इस प्रकार महायुति को विपक्ष पर 313 वोटों की बड़ी बढ़त हासिल है। इन आंकड़ों से महायुति की स्थिति बेहद मजबूत मानी जा रही है।

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