आश्रमशालाओं को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का दर्जा, महिला चौकीदारों की होगी नियुक्ति: लीना बनसोड

Nashik Tribal Conference: नासिक में आयोजित राज्य स्तरीय अधिवेशन में आदिवासी विकास आयुक्त लीना बनसोड ने कहा कि आदिवासी आश्रमशालाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों तक विकसित किया जाएगा।
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Tribal Ashram Schools Maharashtra (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Tribal Ashram Schools Maharashtra: आदिवासी आश्रमशालाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्कूलों के समान मानक प्रदान करने के लिए शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों सहित सभी स्तरों पर सामूहिक प्रयास करने होंगे। विशेष रूप से कक्षा 1 और 2 के छोटे बच्चों की देखभाल के लिए निवासी दाई, निवासी केयर टेकर और महिला चौकीदार उपलब्ध कराने हेतु विशेष प्रयास किए जाएंगे, यह प्रतिपादन आदिवासी विकास आयुक्त लीना बनसोड ने किया। वे महाराष्ट्र राज्य कास्ट्राईब कर्मचारी कल्याण महासंघ के आदिवासी विकास विभाग अधिकारी एवं कर्मचारी संगठन द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय अधिवेशन में बोल रही थीं। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता महासंघ के अध्यक्ष अरुण गाडे ने की।

एनसीपीसीआर नियमावली लागू करने की मांग

अधिवेशन के दौरान कई महत्वपूर्ण नीतिगत मांगें प्रस्तुत की गईं। इसमें प्रमुख रूप से नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) 2018 की छात्रावास नियमावली को लागू करने की मांग उठाई गई। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि यह नियमावली लागू होती है, तो प्रति 50 छात्रों पर 11 कर्मचारी होना अनिवार्य हो जाएगा, जिससे बड़े पैमाने पर नई भर्तियों का मार्ग प्रशस्त होगा।

कर्मचारी संगठन के अधिवेशन में उठी मांगें

इस अवसर पर मंच पर आदिवासी अपर आयुक्त दिनकर पावरा, लोकशाहीर संभाजी भगत, प्रा। मधुकर उईके, अति महासचिव सुशील तायडे सहित कई गणमान्य पदाधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का प्रास्ताविक सुशील तायडे ने किया, संचालन सीताराम राठौड़ ने और आभार प्रदर्शन प्रा। एकनाथ मोरे ने किया।

अधिवेशन के अन्य प्रमुख प्रस्ताव:

  • राजपत्रित दर्जा: गृहपाल (वार्डन) संवर्ग को राजपत्रित अधिकारी का दर्जा प्रदान किया जाए।
  • आहार विशेषज्ञ: आश्रमशालाओं और छात्रावासों में 'डायटीशियन' (आहार विशेषज्ञ) का पद सृजित हो।
  • कार्य समय: कर्मचारियों के लिए 24 घंटे की सेवा के बजाय 8-8 घंटे की शिफ्ट प्रणाली लागू की जाए।
  • पद सृजन: निवासी अधीक्षक, प्रधानाध्यापक और उप-प्रधानाध्यापक के पद निर्मित किए जाएं और सभी 'मृत घोषित' पदों को पुनर्जीवित किया जाए।
  • स्वतंत्र आयुक्तालय: आदिवासी विकास विभाग के लिए एक स्वतंत्र 'शिक्षा आयुक्तालय' की स्थापना की जाए।
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