नाफेड और NCCF प्याज खरीद में 24,749 टन का महाघोटाला, रिपोर्ट सौंपने के एक साल बाद भी कार्रवाई नहीं
Nashik Onion Scam: नासिक में नाफेड और एनसीसीएफ की प्याज खरीद में 24,749 टन का बड़ा घोटाला सामने आया है। सतर्कता समिति की जांच रिपोर्ट सौंपने के एक साल बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- Written By: रूपम सिंह
प्याज घोटाला (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nashik Onion NAFED NCCF Fraud: नासिक में पिछले वर्ष नाफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से हुई प्याज खरीद में हजारों टन के कथित घोटाले का खुलासा राज्य सरकार के सहकार, विपणन एवं वस्त्र उद्योग विभाग की सतर्कता समिति ने किया था। समिति ने लगातार छह दिनों तक छापेमारी अभियान चलाकर एनसीसीएफ के 28 तथा नाफेड के 20 खरीद केंद्रों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया था। जांच के दौरान पोर्टल पर दर्ज खरीद और गोदामों में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक के बीच 24,749 टन प्याज का अंतर पाया गया।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि कई किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीओ) ने केवल कागजों पर खरीद दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया। हालांकि, इतनी गंभीर रिपोर्ट सहकार विभाग को सौंपे जाने के एक वर्ष बाद भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सामने आईं कई गंभीर अनियमितताएं
गिरणाकाठ शेतकरी उत्पादक कंपनी ने नियमों को दरकिनार करते हुए प्याज खरीद के लिए सात उप-कंपनियों की नियुक्ति की। बालासाहेब ठाकरे अटल नवोन्मेष संस्था के केंद्र पर 2,263 टन प्याज का हिसाब नहीं मिला। यहां आने वाले वाहनों का रिकॉर्ड, वजन कांटा और क्यूआर कोड जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं भी नहीं थीं। सोनारतारी मल्टीस्टेट एग्रो को-ऑपरेटिव केंद्र पर निगरानी प्रणाली और वजन कांटा नहीं पाया गया।
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यहां खराब और सड़े हुए प्याज की खरीद किए जाने की बात भी सामने आई। पिंपलगांव बसवंत सहकारी खरीद-विक्रय संघ पर अपने कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर नियमों के विपरीत खरीद करने तथा तीसरी कंपनी के साथ उप-भाड़े पर भंडारण समझौता करने का संदेह जताया गया है। रामेश्वर कृषि कल्याण फेडरेशन से जब समिति ने किसानों के भूमि अभिलेख (सातबारा) मांगे, तो संस्था ने उनकी प्रतियां देने से भी इनकार कर दिया।
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48 संस्थाओं में फर्जी बिलों का खेल
समिति की रिपोर्ट के अनुसार 48 खरीद संस्थाओं के पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों और गोदामों में उपलब्ध वास्तविक प्याज के स्टॉक में भारी अंतर पाया गया। कुछ स्थानों पर पोर्टल पर दर्ज खरीद से अधिक प्याज गोदामों में मिला, जबकि कई जगह रिकॉर्ड में अधिक खरीद और वास्तविक स्टॉक कम पाया गया। इससे फर्जी बिलों और रिकॉर्ड में हेराफेरी की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि काजली लगे हुए, 45 मिमी से छोटे आकार के तथा अंकुरित प्याज की खरीद कर सरकारी नियमों का उल्लंघन किया गया।
- प्रभारी पदभार फिलहाल है। रिपोर्ट पर नाफेड ने क्या कार्रवाई की है, इसकी जानकारी लेकर बताऊंगा।
– संदीप जाधव, जिला उपनिबंधक, - 662 महीने पहले मेरा तबादला हो गया था। मेरे कार्यकाल तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
– फैय्याज मुलाणी, पूर्व उपनिबंधक
