

Nashik Simhastha Kumbh Amrit Snan: नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ का आगाज 31 अक्टूबर को धर्मध्वजारोहण के साथ होगा। तपोनिधि आनंद अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत शंकरानंद सरस्वती के अनुसार, 2027 के कुंभ में दो अमावस्या और सूर्यग्रहण का संयोग बन रहा है, जो इसे आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष बनाता है।
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ 2027 में दुर्लभ खगोलीय संयोग के कारण खास होने जा रहा है। तपोनिधि आनंद अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत शंकरानंद सरस्वती के अनुसार, कुंभ के दौरान दो अमावस्या और सूर्यग्रहण का संयोग बनेगा और ऐसा संयोग करीब 180 वर्षों बाद नासिक में बन रहा है।
31 अक्टूबर को धर्मध्वजारोहण के साथ सिंहस्थ का आगाज होगा, जबकि 2 अगस्त 2027 को पहला अमृत स्नान होगा।
नासिक-त्र्यंबकेश्वर में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। शासन-प्रशासन के साथ विभिन्न पंच-संप्रदायों और अखाड़ों ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सिंहस्थ का औपचारिक आगाज 31 अक्टूबर को धर्मध्वजारोहण के साथ होने जा रहा है।
नागा संन्यासी परंपरा के सात प्रमुख अखाड़ों में से एक तपोनिधि आनंद अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत शंकरानंद सरस्वती ने कुंभ की तैयारियों और इसके आध्यात्मिक महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कुंभ में स्नान और विशेष तिथियों का धार्मिक महत्व होता है।
महंत शंकरानंद सरस्वती के अनुसार, इस बार नासिक-त्र्यंबकेश्वर में प्रमुख अमृत स्नानों के दौरान दुर्लभ खगोलीय संयोग बन रहा है। उनके मुताबिक, करीब 180 वर्षों बाद कुंभ के दौरान नासिक में ऐसा संयोग बन रहा है।
उन्होंने बताया कि पहला अमृत स्नान 2 अगस्त 2027 को आषाढ़ सोमवती अमावस्या के अवसर पर होगा। इसी दिन सूर्यग्रहण होने की बात भी उन्होंने कही। इसके बाद दूसरा और मुख्य अमृत स्नान 31 अगस्त 2027 को श्रावण अमावस्या के अवसर पर होगा।
महंत के अनुसार, दो अमावस्या और सूर्यग्रहण का यह संयोग 2027 के नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष बनाता है।
महंत शंकरानंद सरस्वती ने कहा कि देश के अन्य कुंभ स्थल भी पवित्र हैं, लेकिन त्र्यंबकेश्वर की अपनी विशिष्ट धार्मिक और पौराणिक पहचान है। उनके अनुसार, यहां भगवान विष्णु, भगवान ब्रह्मा और भगवान शंकर की उपस्थिति की धार्मिक मान्यता इसे विशेष बनाती है।
उन्होंने कहा कि त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र लंबे समय से तप और साधना की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने देश-विदेश के सनातन धर्मावलंबियों से सिंहस्थ के दौरान त्र्यंबकेश्वर आने, पवित्र कुशावर्त कुंड में स्नान करने और भगवान त्र्यंबकेश्वर के दर्शन करने का आह्वान किया।
त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में करीब 50 वर्षों से संन्यास जीवन व्यतीत कर रहे महंत शंकरानंद सरस्वती ने युवाओं के बदलते रुख पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में युवाओं में सनातन धर्म के प्रति जागरूकता और आकर्षण बढ़ा है।
प्रयागराज महाकुंभ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां बड़ी संख्या में युवा श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी तरह नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ में भी देश के विभिन्न हिस्सों से युवाओं के बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना है।