कुंभ के लिए सड़क निर्माण, लेकिन नासिक-त्र्यंबकेश्वर मार्ग पर जनता की बढ़ी परेशानी; गड्ढों से रोज हो रहे हादसे

Nashik Diversion Road Potholes: नासिक-त्र्यंबकेश्वर रोड के निर्माण के कारण यातायात वैकल्पिक मार्ग पर मोड़ा गया है, लेकिन गहरे गड्ढों और धूल से यह रास्ता बेहद खतरनाक बन गया है।
Road Construction for the Kumbh: Public Hardships Mount on the Nashik-Trimbakeshwar Route; Potholes Causing Daily Accidents
Nashik Trimbakeshwar Road Construction ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nashik Trimbakeshwar Road Construction: नासिक आगामी सिंहस्थ कुंभमेले की भव्यता के लिए नासिक और त्र्यंबकेश्वर के बीच सड़कों का जाल तो बिछाया जा रहा है, लेकिन यह 'विकास' वर्तमान में आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गया है।

मुख्य सड़क का काम शुरू होने के कारण जिस वैकल्पिक मार्ग पर यातायात मोड़ा गया है, उसकी स्थिति अत्यंत दयनीय और जानलेवा हो चुकी है। किसी भी प्रमुख राजमार्ग का काम शुरू करने से पहले एक सुरक्षित सर्विस रोड या वैकल्पिक मार्ग तैयार करना अनिवार्य तकनीकी नियम है।

वर्तमान वैकल्पिक रास्ता केवल धूल और गहरे गड्डों का ढेर है। 2-3 फीट गहरे गड्डों के कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालक फिसलकर चोटिल हो रहे हैं।

भारी वाहनों के पहिए इन गड्डों में धंसने से घंटों तक जाम लगा रहता है, जिससे एम्बुलेंस और स्कूल बसों को भी रास्ता नहीं मिल पा रहा है। सड़क पर पानी का छिड़काव न होने से दिन भर धूल उड़ती रहती है, जिससे वाहन चालकों को सामने का रास्ता दिखाई नहीं देता।

प्रशासनिक तानाशाही और राजनैतिक चुप्पी

हैरानी की बात यह है कि इस जानलेवा सड़क पर हजारों श्रद्धालु और नागरिक अपनी जान जोखिम में डालकर सफर कररहे हैं, लेकिन जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग 'कुंभकर्णी नींद' में हैं, निर्माण स्थल पर न तो रेडियम बोर्ड लगाए गए हैं और न ही रात के समय पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था है।

सत्ताधारी दल काम का श्रेय लेने में व्यस्त हैं और विपक्ष केवल कागजी बयानों तक सीमित है। किसी भी जनप्रतिनिधि ने ठेकेदार या लोक निर्माण विभाग को अब तक आड़े हाथों नहीं लिया है।

नागरिकों ने प्रशासन से पूछा है कि अगर इस सड़क पर कोई बड़ी अनहोनी होती है, तो क्या संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी?

जनता की प्रमुख मांगें

मुख्य कार्य के समानांतर चलने वाले सर्विस रोड का तुरंत डामरीकरण कर उसे पक्का किया जाए। धूल को दबाने के लिए दिन में कम से कम 3-4 बार पानी का छिड़काव अनिवार्य हो, रात के समय हादसों को रोकने के लिए चेतावनी बोर्ड और रिफ्लेक्टर्स लगाए जाएं।

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