मालेगांव कनेक्शन से मलेशिया तक की साजिश, नासिक के TCS धर्मांतरण मामले में बड़ा अंतरराष्ट्रीय खुलासा
Malaysia Connection Terror: नासिक के TCS धर्मांतरण केस में मलेशियाई कनेक्शन का खुलासा। आरोपी निदा खान पर पीड़िता को मलेशिया भेजने और हिजाब की ट्रेनिंग देने का आरोप। 2 मई को आएगा फैसला।
- Written By: गोरक्ष पोफली
निदा खान (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nashik TCS Conversion Case: नासिक रोड स्थित टीसीएस (TCS) कंपनी में कार्यरत एक युवती के जबरन धर्मांतरण के प्रयास के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले की मुख्य आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकारी वकील अजय मिसर ने कोर्ट के समक्ष ऐसे तथ्य रखे हैं, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है। प्राथमिक जांच में इस अपराध के तार मलेशिया से जुड़े वित्तीय संबंधों से मिलते दिख रहे हैं।
मलेशिया भेजने और पहचान बदलने की साजिश
अदालत में दी गई जानकारी के अनुसार, पीड़िता का न केवल धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया गया, बल्कि उसका नाम तक बदल दिया गया था। साजिश के तहत पीड़िता को इमरान नामक एक रहस्यमयी व्यक्ति के साथ काम करने के बहाने मलेशिया भेजने की तैयारी थी। सरकारी पक्ष का दावा है कि यह केवल एक कर्मचारी का मामला नहीं, बल्कि मालेगांव से संचालित होने वाला एक बड़ा धर्मांतरण सिंडिकेट हो सकता है।
डिजिटल माध्यम से ब्रेनवाश और ट्रेनिंग
जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी निदा खान ने पीड़िता के मोबाइल में विशेष धार्मिक एप्लिकेशन डाउनलोड करवाए थे। पीड़िता को यूट्यूब लिंक, इंस्टाग्राम रील्स और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से धार्मिक कट्टरता की शिक्षा दी जा रही थी। इतना ही नहीं, पीड़िता को हिजाब पहनने और रमजान के नियमों का कड़ाई से पालन करने का प्रशिक्षण भी दिया गया था। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि पीड़ितों के बयानों में मालेगांव के कई संदिग्ध संपर्कों का जिक्र है, जिनकी जांच होना अनिवार्य है।
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अदालत में दलीलें और गिरफ्तारी पर सस्पेंस
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि महाराष्ट्र में वर्तमान में कोई अलग धर्मांतरण विरोधी कानून नहीं है, इसलिए यह अपराध तकनीकी रूप से किस श्रेणी में आता है, इस पर सवाल है। साथ ही निदा खान के गर्भवती होने का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर जमानत की मांग की गई। हालांकि, सरकारी वकील ने विरोध करते हुए कहा कि आरोपी का मोबाइल फोन जब्त करना और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच करना बेहद जरूरी है, इसलिए उसे हिरासत में लेना आवश्यक है। न्यायमूर्ति के. जी. जोशी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब 2 मई को तय होगा कि निदा खान को सलाखों के पीछे जाना होगा या उसे अंतरिम राहत मिलेगी।
