

नाशिक सिंहस्थ कुंभ के शुरुआती सात दिनों में दो विश्व रिकॉर्ड दर्ज।
25 अक्टूबर 2026 को 517 शंखवादकों ने एक साथ शंखनाद किया।
31 अक्टूबर को 6,233 श्रद्धालुओं की सामूहिक गोदा आरती गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सिंहस्थ ध्वजारोहण समारोह में उपस्थिति रही।
नाशिक और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में करीब 35 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्यों का नियोजन।
Nashik Simhastha Kumbh Mela 2 Guinness World Records: नासिक के सिंहस्थ कुंभ मेले ने शुरुआत के महज सात दिनों में दो विश्व रिकॉर्ड बनाकर वैश्विक पहचान हासिल की है। 517 शंखवादकों के सामूहिक शंखनाद और 6,233 श्रद्धालुओं की गोदा आरती ने इतिहास रचा। वहीं, नाशिक-त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में करीब 35 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्यों की योजना बनाई गई है।
नासिक, आस्था, परंपरा और विकास के संगम के रूप में नासिक का सिंहस्थ कुंभ इस बार नए इतिहास की ओर बढ़ रहा है। आयोजन के शुरुआती महज सात दिनों में दो विश्व रिकॉर्ड दर्ज होने से इसे 'रिकॉर्ड कुंभ' के रूप में पहचान मिलने लगी है। एक ओर हजारों श्रद्धालुओं ने सामूहिक शंखनाद और गोदा आरती के जरिए धार्मिक परंपरा को वैश्विक मंच तक पहुंचाया है, वहीं दूसरी ओर नासिक और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में करीब 35 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्यों का नियोजन किया गया है।
सिंहस्थ कुंभ के दौरान पहला विश्व रिकॉर्ड 25 अक्टूबर 2026 को बनाया गया। रामतीर्थ पर 517 शंखवादकों ने एक साथ शंखनाद किया। सामूहिक शंखध्वनि से पूरा परिसर गूंज उठा और इस आयोजन ने नासिक को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई।
इसके बाद 31 अक्टूबर को दूसरा रिकॉर्ड बना। रामतीर्थ पर 6 हजार 233 श्रद्धालुओं ने एक साथ गोदा आरती की। हजारों हाथों में प्रज्वलित आरती के दीप, एक लय में गूंजते आरती के स्वर और मंत्रोच्चार ने आयोजन को यादगार बना दिया। इस सामूहिक गोदा आरती को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
गोदावरी नदी नासिक सिंहस्थ की धार्मिक आस्था, संस्कृति और पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रामतीर्थ पर आयोजित सामूहिक गोदा आरती ने इसी आस्था को एक बड़े सामूहिक स्वरूप में प्रस्तुत किया। हजारों श्रद्धालुओं की एक साथ भागीदारी ने आयोजन को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से खास बना दिया।
महज एक सप्ताह में दो विश्व रिकॉर्ड बनने से सिंहस्थ की शुरुआत ही ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ हुई है। आने वाले समय में भी ऐसे आयोजनों और संभावित रिकॉर्ड को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता बढ़ रही है।
सिंहस्थ ध्वजारोहण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति भी इस आयोजन का महत्वपूर्ण पहलू रही। धार्मिक परंपराओं के साथ राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस पहचान ने सिंहस्थ के महत्व को और व्यापक बनाया है।
इस बार सिंहस्थ की विशेषता केवल धार्मिक आयोजनों और विश्व रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। नासिक और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए करीब 35 हजार करोड़ रुपये के कार्यों का नियोजन किया गया है।
इनमें सड़कें, जलापूर्ति, स्वच्छता, यातायात व्यवस्था, नदी संरक्षण और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास शामिल है। इतने बड़े स्तर पर विकास कार्यों की योजना से कुंभ के व्यापक स्वरूप का अंदाजा लगाया जा सकता है।
धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत, विश्व रिकॉर्ड और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ नासिक का सिंहस्थ इस बार कई मायनों में खास बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।