Nashik Simhastha Kumbh: सिंहस्थ धर्म ध्वजारोहण में स्टार धर्म गुरुओं से दूरी, क्या मेला प्राधिकरण की मजबूरी?

Nashik Simhastha Kumbh Dhwajarohan: सिंहस्थ कुंभ का आगाज 31 अक्टूबर को धर्म ध्वजारोहण से होगा। समारोह में 13 अखाड़ों से दो-दो प्रतिनिधियों को बुलाने की तैयारी व बड़े संतों के निमंत्रण पर चर्चा है।
Nashik Simhastha Kumbh Dhwajarohan Akhara Invitation Controversy
धर्म ध्वजारोहण समारोह(फोटो नवभारत)
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Highlights

  • नासिक और त्र्यंबकेश्वर में 31 अक्टूबर को धर्म ध्वजारोहण की तैयारी।

  • प्रत्येक अखाड़े से दो प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने की योजना बताई गई है।

  • आचार्य महामंडलेश्वरों और जगद्गुरुओं को निमंत्रण न मिलने की चर्चा; आधिकारिक पुष्टि जरूरी।

Akhara Invitation Controversy: नासिक सिंहस्थ कुंभ का आगाज 31 अक्टूबर को त्रयंबकेश्वर और नासिक में धर्म ध्वजारोहण से हो जाएगा। और इस धर्म ध्वजारोहण की तैयारी के लिए प्रशासन मेल विकास प्राधिकरण नासिक नगर निगम त्रंबकेश्वर नगर परिषद और नासिक और त्रंबकेश्वर का पुरोहित संघ पूरे दम काम के साथ तैयारी में जुटा है।

नासिक जिले के पालक मंत्री और कुंभ मेला प्रभारी मंत्री गिरीश महाजन इसे गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड वाला समारोह बनाना चाहते हैं लेकिन यहां पर विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि उक्त अलौकिक और सिंहस्थ कुंभ के आगाज होने वाले समझ में देशभर में मान्यता प्राप्त 13 अखाड़े में से प्रतीक अखाड़े के दो दो प्रतिनिधियों को ही आमंत्रण पत्र भेजने की तैयारी चल रही है, जो बात अखाड़े के अंदर चर्चा का विषय बनी हुई है।

दो लोगों को आमंत्रण इसमें से कौन जाए कौन नहीं अखाड़े अपनी तरफ से किसको बुलाए किसको नहीं यह इस समय मंथन का सबसे प्रमुख विषय बन गया है। यहां पर यह बता दिया जाए की कुंभ के सफल संचालन और अखाड़े और प्रशासन के बीच तालमेल और सामंजस बनाने के लिए प्रत्येक अखाड़े से दो दो प्रतिनिधियों की एक कमेटी बनाई जाती है और इनका नाम अखाड़े के द्वारा प्रशासन या मेल विकास प्राधिकरण को भेज दिया गया है।

संन्यासी अखाड़ों के आचार्य और जगत गुरुओं से दूरी?

मेला विकास प्राधिकरण प्रत्येक अखाड़े से इन्हीं दो नाम को धर्म ध्वजारोहण समारोह में आमंत्रित कर रहा है। यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि यह दोनों नाम अखाड़े की व्यवस्था संचालित करने वालों में प्रमुख होते हैं जिसमें एक राष्ट्रीय पदाधिकारी और एक स्थानीय संचालन करता का नाम होता है?

यहां पर चल रही चर्चा के अनुसार और विभिन्न अखाड़ों से मिल रही जानकारी मेला विकास प्राधिकरण याद नगर परिषद या यह भी कहा जा सकता है कि पुरोहित संघ के द्वारा जो धर्म ध्वजारोहण का प्लान तैयार किया गया है उसमें अखाड़े के पदाधिकारी को तो आमंत्रित किया जाएगा लेकिन अखाड़े के आचार्य और जगत गुरुओं से उक्त समारोह से दूरी बनाने की तैयारी है?

यहां पर यह बता दिया जाए कि भारत के सबसे बड़े अखाड़े के रूप में सन्यासी परंपरा के जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी, निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलसानंद गिरी, आवाहन अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अरुण गिरी अवधूत बाबा महा निर्वाणी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर राजगुरु विशोकानंद भारती आनंद अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर बालिका नंद गिरी अटल अखाड़े के आचार महामंडलेश्वर स्वामी विश्वमातानंद सरस्वती अग्नि अखाड़े के आचार महामंडलेश्वर स्वामी रामकृष्णानंद के साथ उदासीन परंपरा के भी गुरु कृष्ण चिदा मुनि बाबा रामदेव जैसे स्टार धर्म गुरु निमंत्रण नहीं भेजा जा रहा है। इनके अलावा जूना निरंजन के द्वारा बनाए गए जगत गुरुओं को भी इस समारोह से दरकिनार कर दिया गया है?

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प्रोटोकॉल या जगह का अभाव कौन सी मजबूरी?

अधिकतर अखाड़े में चल रही चर्चा के अनुसार तमकेश्वर में धर्म ध्वजारोहण के लिए कांच काम कोटी पीठ के शंकराचार्य स्वामी विधु शेखर भारती मुख्य अतिथि होंगे ऐसे में उनके सामने और अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर जगत गुरुओं को लेकर प्रोटोकॉल की भी समस्या खड़ी हो सकती है?

वही इस विषय में प्रशासन की तरफ से तर्क है की जगह की कमी है मंच पर ज्यादा लोगों को स्थान नहीं दिया जा सकता और यह भी एक बड़ा कारण है कि बड़े धर्म गुरुओं को या संन्यासी अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर जगत गुरुओं को नहीं बुलाया जा रहा है?

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तीसरी और सबसे प्रमुख बात यह भी निकल कर आ रही है कि प्रशासन के द्वारा सिंहस्थ कुंभ की तैयारी को लेकर अभी तक कोई ठोस मास्टर प्लान नहीं बनाया गया है और जो भी बनाया गया है वह केवल कागज पर है धरातल पर शून्य है इस पर बहुत ज्यादा सवाल ना हो और कोई बड़ा धर्म गुरु कोई टीका टिप्पणी न कर दे जिससे प्रशासन और सरकार की भद्र पिट जाए इस पर भी विशेष ध्यान देते हुए स्टार धर्म गुरुओं को दूर रखा गया है?

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