

Nashik Savarkar Memorial Committee News: नर्सिंह नगर स्थित मनपा की आरक्षित जमीन पर प्रस्तावित सावरकर स्मारक को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। इस जमीन पर बैडमिंटन टेनिस कोर्ट बनाए जाने का विरोध करते हुए उपमहापौर विलास शिंदे ने महापौर हिमगौरी अडके की मौजूदगी में भाजपा विधायक देवयानी फरांदे पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा। विलास शिंदे ने आरोप लगाया कि सावरकर के नाम पर राजनीति करने वाले ही अब उनके स्मारक का विरोध कर रहे हैं।
इस बयान के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन में विवाद बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, प्रभाग 8 के नरसिंहनगर स्थित सर्वे नंबर 708/1/1 की आरक्षित जमीन पर कुछ वर्ष पहले स्वातंत्र्यवीर सावरकर स्मारक बनाने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए मनपा में प्रस्ताव भी पारित किया गया था तथा स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की एक स्मारक समिति का गठन किया गया था। इसी बीच, पिछले कुछ महीनों से उसी स्थान पर ‘शिवसत्य क्रीड़ा संकुल’ का निर्माण कार्य शुरू किया गया है।
इसमें बैडमिंटन कोर्ट बनाए जाने की पहल विधायक देवयानी फरांदे द्वारा किए जाने की चर्चा है। इस मुद्दे को उठाते हुए विलास शिंदे ने महापौर, आयुक्त, शिक्षा मंत्री और उपमुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा है कि मनपा के प्रशासकीय कार्यकाल में इस स्थान पर क्रीड़ा संकुल निर्माण की अनुमति किसने दी, किसके निर्देश पर दी गई और आखिर स्मारक की जमीन पर खेल संकुल क्यों बनाया जा रहा है।
साथ ही अनुमति देने वाले अधिकारियों की जांच कर कार्रवाई की मांग भी की गई है। इस मामले पर बोलते हुए विलास शिंदे ने कहा कि वह स्वयं सावरकर स्मारक समिति का हिस्सा रहे हैं। समिति का काम जारी रहने के बावजूद उसी स्थान पर सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से क्रीड़ा संकुल बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सावरकर स्मारक का विरोध कौन कर रहा है और किसके हित में बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण कराया जा रहा है।
इस पूरे मामले के दौरान महापौर हिमगौरी आडके, आयुक्त मनिषा खतरी और स्थायी समिति सभापति मच्छिंद्र सापन उपस्थित थे, लेकिन किसी ने भी इस विषय पर प्रतिक्रिया नहीं दी। शिंदे द्वारा मनपा को पत्र दिए जाने की जानकारी देने के बावजूद महापौर और आयुक्त ने टिप्पणी करने से परहेज किया, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
उपमहापौर विलास शिंदे ने कहा कि निर्धारित स्थान पर स्वातंत्र्यवीर सावरकर का स्मारक ही बनेगा। वहां किसी अन्य निर्माण को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो प्रभाग के नागरिकों के साथ आंदोलन किया जाएगा।