नासिक: रंगपंचमी को ‘राज्य महोत्सव’ बनाने की मांग तेज, विधायक देवयानी ने CM Fadnavis को सौंपा ज्ञापन

Maharashtra Tourism News: विधायक देवयानी फरांदे ने नासिक की 300 साल पुरानी पेशवा कालीन 'रहाड़' रंगपंचमी को 'राज्य महोत्सव' का दर्जा देने की मांग की है, जिससे पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बल मिलेगा।
MLA Devayani Pharande demands 'State Festival' status for Nashik's 300-year-old 'Rahad' Rangpanchami to boost tourism and preserve the unique Peshwa-era cultural heritage.
विधायक देवयानी फरांदे ने सीएम Devendra Fadnavis को सौंपा ज्ञापन (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Nashik Rangpanchami News: नासिक की सदियों पुरानी और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए शहर की 'रंगपंचमी' को 'राज्य महोत्सव' का दर्जा देने की मांग जोर पकड़ रही है। नाशिक मध्य विधानसभा क्षेत्र की विधायक देवयानी फरांदे ने मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री को पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक उत्सव को आधिकारिक राजकीय मान्यता देने का आग्रह किया है।

विधायक फरांदे ने अपने निवेदन में कहा कि नाशिक की रंगपंचमी का इतिहास लगभग 300 वर्ष पुराना है, जिसकी शुरुआत पेशवा काल में हुई थी। पूरे राज्य में जहां होली के अगले दिन धुलिवंदन पर रंग खेला जाता है,

वहीं नासिक एकमात्र ऐसा शहर है जहां होली के पांच दिन बाद यानी रंगपंचमी पर मुख्य उत्सव मनाया जाता है। इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यहां की 'रहाड़' संस्कृति है। पेशवा काल में खोदी गई ये रहाड़ें आज भी सामाजिक एकता का प्रतीक हैं। इन रहाड़ों में प्राकृतिक फूलों से बने रंगों का उपयोग किया जाता है, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ त्वचा के लिए भी सुरक्षित होते हैं।

दर्जा मिलने से होंगे कई लाभ

  • विधायक फरांदे के अनुसार, नाशिक की रंगपंचमी केवल एक त्योहार नहीं बल्कि एक बड़ा सास्कृतिक आयोजन है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक नाशिक आते हैं।
  • यदि इसे 'राज्य महोत्सव' का दर्जा मिलता है, तो इसके कई फायदे होंगे। शासन स्तर पर उत्सव का व्यापक नियोजन और प्रचार-प्रसार हो सकेगा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत पर गर्व महसूस होगा।

देवयानी ने जताई प्रतिबद्धता

पर्यटन बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था और व्यापार को मजबूती मिलेगी। ऐतिहासिक रहाड़ों के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकारी सहायता मिल सकेगी, विधायक प्रो। देवयानी फरांदे ने कहा कि नाशिक को धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का वरदान प्राप्त है। पेशवा काल से चली आ रही 'रहाड़' परंपरा आज भी नाशिक की विशिष्ट पहचान है। उन्होंने कहा कि मैं इस उत्सव को 'राज्य महोत्सव' का दर्जा दिलाने के लिए पूरी तरह प्रयासरत हूं।

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