9 लाख परिवारों के चूल्हे पर युद्ध की आंच, नासिक के पोल्ट्री व्यवसाय में बड़ा संकट

Gulf War Impact Agriculture: ईरान-इजराइल युद्ध के कारण नासिक के पोल्ट्री संचालकों का अंडा निर्यात बंद हुआ। ₹3.60 तक गिरी कीमतें, 9 लाख परिवारों के रोजगार पर संकट।
The Heat of War Reaches the Kitchens of 900,000 Families: Major Crisis Grips Nashik's Poultry Industry
पोल्ट्री व्यवसाय (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nashik Poultry Farm Crisis: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी अंतरराष्ट्रीय तनाव और खाड़ी देशों में युद्ध जैसी परिस्थितियों ने सात समंदर पार नासिक जिले के पोल्ट्री व्यवसाय की कमर तोड़ दी है। कभी मुनाफे का सौदा रहने वाला यह व्यवसाय अब घाटे की गर्त में चला गया है। खाड़ी देशों को होने वाला अंडा निर्यात पूरी तरह बंद होने से घरेलू बाजार में अंडों की बाढ़ आ गई है, जिससे कीमतें उत्पादन लागत से भी नीचे गिर गई हैं।

मांग और आपूर्ति का गणित बिगड़ा

भारत से ओमान, कतर, दुबई, मालदीव और बहरीन जैसे देशों को प्रतिदिन लगभग 8 करोड़ अंडों का निर्यात किया जाता था। पिछले डेढ़ महीने से युद्ध के चलते यह निर्यात पूरी तरह ठप है। युद्ध से पहले अंडों की थोक कीमत 560 रुपये प्रति सैकड़ा (₹5.60/अंडा) थी, जो अब लुढ़ककर मात्र 360 रुपये प्रति सैकड़ा (₹3.60/अंडा) रह गई है। पोल्ट्री संचालकों के अनुसार, एक अंडे के उत्पादन की लागत करीब ₹4.60 आती है। बाजार में ₹3.60 मिलने के कारण किसानों को हर अंडे पर ₹1 का सीधा घाटा और संभावित लाभ मिलाकर ₹2 का कुल नुकसान उठाना पड़ रहा है।

9 लाख परिवारों के रोजगार पर मंडराया खतरा

नासिक जिला पोल्ट्री व्यवसाय का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ 1000 से अधिक पंजीकृत फार्म हैं। पूरे महाराष्ट्र में लगभग 9 लाख परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस व्यवसाय से जुड़े हैं। निर्यात रुकने के साथ-साथ भीषण गर्मी ने भी मांग को कम कर दिया है, जिससे पोल्ट्री संचालक दोहरी मार झेल रहे हैं। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो कई छोटे पोल्ट्री फार्म बंद होने की कगार पर पहुँच जाएंगे।

सरकार से मुआवजे और राहत की गुहार

पोल्ट्री व्यवसायी प्रभाकर बिडगर और जिले के अन्य संचालकों ने राज्य सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • सस्ता चारा: पोल्ट्री फीड के लिए जरूरी मक्का, सोयाबीन और टुकड़ा चावल रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जाए।
  • टैक्स में छूट: ग्राम पंचायतों द्वारा पोल्ट्री शेड पर लगाए गए टैक्स को कम किया जाए और बिजली बिलों में राहत दी जाए।
  • कर्ज राहत: पोल्ट्री फार्म के लिए लिए गए बैंक ऋण के ब्याज में विशेष रियायत या 'ब्याज माफी' प्रदान की जाए।
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