

Manmad To Chennai Onion Prices Rise: प्याज़ की कीमतों में वृद्धि होते ही केंद्र सरकार ने दामों को नियंत्रित करने के लिए नाफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से खरीदे गए बफर स्टॉक के प्याज को विभिन्न राज्यों में भेजना शुरू कर दिया है।
लासलगांव के बाद, शुक्रवार रात मनमाड से 800 टन प्याज लेकर 'प्याज़ एक्सप्रेस' चेन्नई के लिए रवाना हुई। केंद्र सरकार का कहना है कि यह कदम आम उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर प्याज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार के इस निर्णय पर विभिन्न किसान संगठनों और प्याज उत्पादक किसानों ने कड़ा विरोध और नाराजगी व्यक्त की है। किसानों का आरोप है कि पिछले दो वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अब जाकर प्याज के कुछ अच्छे दाम मिलने लगे थे, लेकिन केंद्र सरकार कीमतों को नीचे गिराने का प्रयास कर रही है।
किसानों ने माँग की है कि सरकार केवल उपभोक्ताओं ही नहीं, बल्कि प्याज उगाने वाले किसानों के हित का भी ध्यान रखे। गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व प्याज की कीमतों में भारी गिरावट के बाद केंद्र सरकार ने नासिक जिले से लगभग 2 लाख टन से अधिक प्याज खरीदने का निर्णय लिया था।
हालाँकि, कड़ी शर्तों और कम दरों के कारण दोनों संस्थाएँ केवल 1 लाख टन के आसपास ही प्याज खरीद सकी थीं, जिसे वखार महामंडल के गोदामों में संग्रहित किया गया था। हाल के दिनों में प्याज की कीमतों में सुधार होते ही केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक से रेल के माध्यम से आपूर्ति शुरू कर दी।
इसी कड़ी में पहली प्याज़ एक्सप्रेस लासलगांव से 450 टन प्याज लेकर दिल्ली भेजी गई थी, जिसके बाद अब मनमाड से 21 डिब्बों की मालगाड़ी द्वारा 800 टन प्याज चेन्नई भेजा गया है। किसानों का कहना है कि जब उनके पास पर्याप्त प्याज था, तब उन्हें मात्र 700 से 900 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा था, जिससे लागत भी नहीं निकल पा रही थी।
भविष्य में अच्छे दाम की उम्मीद में जो प्याज भंडारण कक्षों (चाली) में रखा गया था, उसमें से 40 से 50 प्रतिशत खराब हो चुका है। अब जब बचे हुए सीमित स्टॉक का उचित मूल्य मिल रहा है, तब सरकार बफर स्टॉक जारी कर बाजार गिराने में जुट गई है।
किसानों ने सवाल उठाया कि जब पेट्रोल, डीजल, दाल और तेल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, तब कोई आवाज नहीं उठाता, लेकिन प्याज के दामों में मामूली बढ़त होते ही यह कदम क्यों उठाया जाता है?