

Nashik Municipal Corporation: नासिक महानगरपालिका में स्वीकृत (मनोनीत) पार्षदों की लंबे समय से अटकी नियुक्ति प्रक्रिया आखिरकार अदालती आदेश के बाद आगे बढ़ने जा रही है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने महानगरपालिका प्रशासन को आगामी छह सप्ताह के भीतर स्वीकृत पार्षदों के पदों को भरने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
मंगलवार 29 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान मनपा प्रशासन ने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए अदालत से चार महीने का अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन अदालत ने इस मांग को खारिज करते हुए छह सप्ताह में प्रक्रिया संपन्न करने का आदेश दिया।
नियमानुसार मनपा का आम चुनाव संपन्न होने के एक महीने के भीतर स्वीकृत पार्षदों के चयन की प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए थी। हालांकि, लंबा समय बीत जाने के बाद भी नियुक्तियां न होने पर अदालत ने मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और पूछा कि चुनाव के काफी समय बाद भी चार महीने की और मोहलत क्यों चाहिए।
अदालत के इस आदेश से पिछले कई महीनों से लंबित 10 स्वीकृत पार्षदों के चयन का रास्ता साफ हो गया है। दलीय संख्याबल के आधार पर 10 सीटों का संभावित गणित राजनीतिक गलियारों में पहले से ही चर्चा में है। 122 पार्षदों वाली नासिक मनपा में भाजपा के 72, शिंदे शिवसेना के 26, उद्धव शिवसेना के 15, राकांपा (अजित पवार गुट) के 4, कांग्रेस के 3, मनसे का 1 और 1 निर्दलीय पार्षद शामिल हैं।
इस संख्याबल के अनुसार 10 स्वीकृत सीटों में से भाजपा को 6, शिंदे शिवसेना को 2, जबकि उद्धव शिवसेना और कांग्रेस को 1-1 सीट मिलने का समीकरण बन रहा है। कांग्रेस के गट नेता सूफी जीन ने इन नियुक्तियों को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिस पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने प्रशासन को तय समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
मनपा प्रशासन की ओर से प्रक्रिया पूरी करने के लिए चार महीने की मोहलत मांगी गई थी। हालांकि, अदालत ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि चुनाव के तुरंत बाद पूरी होने वाली प्रक्रिया में इतनी देरी क्यों हुई। अदालत ने प्रशासन का अनुरोध खारिज करते हुए छह सप्ताह के भीतर नियुक्तियां करने के आदेश दिए।
नासिक मनपा के कांग्रेस गट नेता सूफी जीन ने कहा कि हम स्वीकृत पार्षदों की नियुक्ति का मुद्दा लगातार उठा रहे थे। आखिरकार उच्च न्यायालय ने महानगरपालिका को छह सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने के स्पष्ट आदेश दिए हैं। प्रशासन चार महीने का समय मांग रहा था, जो अनुचित था। अदालत के इस फैसले से अब यह प्रक्रिया तय समय में पूरी होगी।