नासिक मनपा में BJP के मतभेद फिर सतह पर, स्थायी समिति चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल; पार्षदों ने जताई नाराजगी
Nashik Municipal Corporation: नासिक मनपा महासभा के बाद भाजपा में मतभेद उभर आए हैं। विकास कार्य PWD से कराने पर पार्षदों ने नाराजगी जताई। आज स्थायी समिति सभापति पद के लिए नामांकन होंगे।
- Written By: अंकिता पटेल
Nashik Municipal Corporation ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Development Works Issue: नासिक महानगरपालिका की हालिया महासभा के बाद भाजपा के अंदरूनी मतभेद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। शहर के विकास कार्य विधायकों द्वारा सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से कराए जाने के मुद्दे पर कुछ पार्षदों ने खुलकर नाराजगी जताई। इस पृष्ठभूमि में आज सोमवार को स्थायी समिति सभापति पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे।
माधुरी बोलकर और दीपाली कुलकर्णी ने भी ठोकी ताल
पूर्व विधायक बालासाहेब सानप के पुत्र मच्छिंद्र सानप का नाम फिलहाल सबसे आगे बताया जा रहा है।। उपमहापौर पद से पीछे हटने के बाद उन्हें अब यह मौका मिल सकता है।
उनके अलावा महापौर पद की इच्छुक रहीं माधूरी बोलकर और वरिष्ठ सदस्य दीपाली कुलकर्णी ने भी अपने प्रयास तेज कर दिए है। इन सभी घटनाक्रमों के बीच मत्री गिरीश महाजन का फैसला अंतिम और निर्णायक माना जा रहा है।
सम्बंधित ख़बरें
16 लाख लीटर डीजल बचत का सुझाव, स्कूल बस संचालकों ने सरकार से मांगा राहत पैकेज; 40 हजार बसों के संचालन पर संकट
महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: ST बसों के ड्राइवर अब बचाएंगे रोजाना हजारों लीटर डीजल, जानें क्या है नया प्लान
मीरारोड में कुर्बानी के बकरों को लेकर मचा बवाल, CM फडणवीस के हस्तक्षेप के बाद हुई कार्रवाई
नासिक मनपा के गरीब और मेधावी छात्रों को मिलेगी मुफ्त कोचिंग; नोट्स और किताबें भी फ्री देगा संचालक संगठन
यह भी पढ़ें:-छत्रपति संभाजीनगर: साइबर अपराध पर जागरूकता, 100 शहरों में कार्यक्रम,फर्जी लिंक और कॉल से सावधान; पुलिस की अपील
(कुल सदस्य – 16)
| क्रमांक | दल | सदस्य संख्या | स्थिति |
|---|---|---|---|
| 1 | भाजपा | 09 | पूर्ण बहुमत |
| 2 | शिवसेना (शिंदे गुट) | 04 | संभावित समर्थक |
| 3 | ठाकरे गुट | 02 | विपक्ष |
| 4 | राष्ट्रवादी कांग्रेस | 01 | तटस्थ / समर्थक |
पार्टी के भीतर कड़ा मुकाबला
स्थायी समिति के 16 सदस्यों में से 9 सदस्य भाजपा के होने के कारण सभापति पद भाजपा के पास जाना लगभग तय है। हालांकि, पार्टी के भीतर प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है और प्रत्येक विधायक अपने समर्थक को अवसर दिलाने के प्रयास में जुटा है। इससे ‘विधायक बनाम पार्षद’ तथा ‘विधायक बनाम विधायक’ जैसी स्थिति बन गई है।
