Gite Brothers की अफवाहों से महायुति में मची खलबली, सोशल मीडिया पर मतपत्र वायरल होने से मचा हड़कंप

Gite Brothers Viral Posts: विधान परिषद चुनाव में गोकुल गिते के नाम से वायरल पोस्ट और मतपत्र ने महायुति में हलचल मचा दी। सफाई देने पहुंचे गिते ने अफवाहों और राजनीतिक संपर्कों पर खुलकर बयान दिया।
Nashik MLC Election Gite Brothers Viral Posts Create Stir In Mahayuti
गोकुल गिते (सोर्स: डिजाइन फोटो)
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Nashik MLC Election Gite Brothers Viral Posts: विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के दिन से ही सुर्खियों में रहे गणेश गिते और गोकुल गिते भाई मतदान के दिन भी चर्चा का केंद्र बने रहे। सोशल मीडिया पर उनके नाम से किए जा रहे प्रचार और उससे महायुति के खेमे में पैदा हुई बेचैनी के कारण आखिरकार दोनों भाइयों को सामने आकर स्पष्टीकरण देना पड़ा। इस घटनाक्रम से साफ हो गया है कि महायुति में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

मतदान शुरू होने के कई घंटों बाद भी निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गिते को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म रहा। मतदान की पूर्व संध्या से ही गिते के समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल की जा रही थीं, जिससे यह चर्चा शुरू हो गई कि वे फिर से पूरी ताकत से मैदान में उतर आए हैं।

इस बीच कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गोकुल गिते के नाम की मतपत्रिका पोस्ट होने से भ्रम और बढ़ गया। इसके बाद महायुति के नेताओं की नींद उड़ गई। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और कुंभमेला मंत्री गिरीष महाजन ने तत्काल फोन कर इस पर पूछताछ की। शीर्ष नेताओं के निर्देश पर गोकुल गिते दोपहर साढ़े बारह बजे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और मीडिया के सामने अपनी स्थिति साफ की।

वरिष्ठ नेताओं को 'कच्चे कान' का नहीं होना चाहिए

मीडिया से बात करते हुए गोकुल गिते ने कहा, नेताओं को शब्द देने के बाद से ही मैंने अपना प्रचार रोक दिया था। कार्यकर्ताओं की पोस्ट के कारण महायुति के नेताओं में भ्रम पैदा हुआ होगा, लेकिन वरिष्ठ नेताओं को भी इतने कच्चे कान का नहीं होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि मतपत्र पर अभी भी उनका नाम मौजूद है, इसलिए अब मतदाता खुद तय करें कि उन्हें क्या करना है।

ठाकरे गुट से कनेक्शन का दावा

इस दौरान गोकुल गिते ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि चुनाव में महाविकास अघाड़ी का कोई आधिकारिक उम्मीदवार न होने के कारण, ठाकरे गुट के लोगों ने उनसे संपर्क साधा था।

उन्होंने पोलिंग बूथ पर प्रतिनिधि नियुक्त करने वाले आवेदन पर उनके हस्ताक्षर मांगे थे, लेकिन उन्होंने हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया। इस पूरे सियासी ड्रामे और अफवाहों ने मतदान के दिन महायुति के रणनीतिकारों को दिनभर परेशान रखा।

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