नासिक में हाउसिंग घोटाला, जांच के दायरे में आ सकते हैं अधिकारी; 49 प्रोजेक्ट्स में अनियमितताओं के आरोप

Nashik MHADA Housing Scam: नासिक के म्हाडा आवास घोटाले में 197 बिल्डरों पर केस दर्ज होने के बाद अब अधिकारियों और कर्मचारियों की गहन जांच की मांग तेज हो गई है।
Housing Scam in Nashik: Officials May Come Under Scrutiny; Allegations of Irregularities in 49 Projects
Nashik Inclusive Housing Scheme Fraud( Source: Social Media )
Published on: 
Updated on: 

Nashik Inclusive Housing Scheme Fraud: नासिक शहर के बहुचर्चित म्हाडा आवास घोटाले में अब राजस्व, भूमि अभिलेख और महानगरपालिका विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की गहन जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।

रिपब्लिकन सेना के जिलाध्यक्ष अविनाश शिंदे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में जिलाधिकारी आयुष प्रसाद और पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक को कड़ा ज्ञापन सौंपा।

म्हाडा की समावेशी आवास योजना में कथित अनियमितताओं के चलते अब तक 197 बिल्डरों और जमीन मालिकों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा चुके हैं। शहर के लगभग 49 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और अल्प आय वर्ग के लिए आरक्षित फ्लैट्स के आवंटन में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आई है।

2013 की समावेशी आवास नीति के तहत 4,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्ट्स में 20 प्रतिशत हिस्सा किफायती आवास के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। आरोप है कि नासिक के कई बिल्डरों ने जाली दस्तावेजों के सहारे म्हाडा और राजस्व विभाग को करोड़ों रुपये का चूना लगाया है।

अधिकारियों की मिलीभगत पर सवाल

रिपब्लिकन सेना ने स्पष्ट किया कि प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं है। संगठन ने प्रमुख मागें रखी है। संबंधित विभागों के दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। घोटाले की पूरी राशि संबंधित दोषियों से वसूली जाए, जांथ समिति की रिपोर्ट के आधार पर उन सभी कड़ियों को जोड़ा जाए जहां फाइलों को गलत तरीके से मंजूरी दी गई।

प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति

ज्ञापन सौंपते समय महानगर प्रमुख डॉ. अनिल आठवले, युवक जिलाध्यक्ष सुनील साळवे, संतोष भालेराव, मारुती घोडेराव सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों को बचाने का प्रयास किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।

बिल्डरों के साथ-साथ उन अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए जिन्होंने फाइलों पर हस्ताक्षर किए, बिना सरकारी संरक्षण के गरीचों के हक के घरों को डकारना मुमकिन नहीं है।

-रिपब्लिकन सेना, जिलाध्यक्ष, अविनाश शिंदे

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com