नासिक में एलपीजी संकट से हाहाकार, एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें; व्यापार पर भी असर

Nashik LPG Cylinder Shortage: नासिक जिले में रसोई गैस की किल्लत से लोगों को भारी परेशानी हो रही है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं, जिससे रमजान की तैयारियों पर भी असर पड़ा है।
LPG Crisis Causes Chaos in Nashik: Long Queues Outside Agencies; Trade Also Hit
Nashik Cooking Gas Crisis( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nashik Cooking Gas Crisis: नासिक जिले में इन दिनों रसोई गैस की किल्ल्त को लेकर मचे हाहाकार ने जनजीवन और व्यापार की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है।

एक तरफ प्रशासन दावा कर रहा है कि घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन दूसरी ओर गैस गोदामों के बाहर लगी लंबी कतारें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।

हालांकि प्रशासन लगातार इस बात के दावे कर रहा है कि गैस की कोई किल्लत नहीं हैं, बावजूद इसके गैस एजेसियों के बाहर लगी लंबी कतारे कम होने का नाम नहीं ले रही है।

गैस की किल्लत की वजह से रमजान की खुशियां भी धूमिल होती दिखाई दे रही है, लोग परेशान है कि त्योहार के दिन भी उन्हें सिलेंडर मिलेगा कि नहीं।

व्यापारिक सिलेंडरों की किल्लत

होटल उद्योग पर ताले कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत और बढ़ती कीमतों के कारण नासिक जिले के बड़े होटलों और खाद्य विक्रेताओं ने अपने शटर गिरा दिए हैं।

सरकार या प्रशासन की ओर से इस पर कोई ठोस स्पष्टीकरण न आने से व्यापारियों में भारी रोष है। होटलों के बंद होने का सीधा असर ऑनलाइन फूड डिलीवरी पर भी पड़ा है।

घर बैठे खाना ऑर्डर करने वाले नागरिकों को अब खुद रसोई में पसीना बहाना पड़ रहा है। नासिक के प्रमुख केंद्रों जैसे मालेगांव, सिन्नर और लासलगांव में भी होटल व्यवसायी गैस की मार झेल रहे हैं।

रमजान पर बढ़ी मुश्किलें

पवित्र रमजान का महीना चल रहा है और ईद-उल-फितर में अब महज एक सप्ताह का समय शेष है। अनुमान है कि गुरुवार को चांद दिखने के बाद शुक्रवार को ईद मनाई जाएगी, ऐसे में मुस्लिम समाज में हर का माहौल है।

प्रशासन द्वारा लागू 25 दिन में एक ही बुकिंग के नियम ने उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी है। रमजान के दौरान गैस की खपत सामान्य से अधिक होती है, लोगों को डर है कि यदि पेन ईद के मौके पर गैस खत्म हो गई, तो मेहमानों की महमान नवाजी और पारंपरिक पकवान कैसे बनेंगे? इसी डर से लोग सीधे गैस गोदामों की और दौड रहे हैं।

कागजों पर चल रहा है ऑल इज वेल

जहां प्रशासन कागजों पर ऑल इज वेल कह रहा है, वहीं हकीकत में सिलेंडरों की कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ गई है। घरेलू सिलेंडर की सप्लाई चेन में देरी के कारण आम आदमी असुरक्षित महसूस कर रहा है। मध्यमवर्गीय परिवारों का कहना है कि अगर सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं हुई, तो उन्हें 'मिट्टी के चूल्हे' की ओर वापस लौटना पड़ सकता है।

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