टैक्स का असर: नासिक में बदला शराब बाजार, महंगी विदेशी शराब से MML की ओर बढ़ा रुझान

Nashik Liquor Market: नासिक में विदेशी शराब की बिक्री पर भारी टैक्स का असर दिखा है। कीमतें बढ़ने से उपभोक्ता सस्ते विकल्प ‘महाराष्ट्र मेड लिकर (MML)' की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं।
Impact of Taxation: Nashik's Liquor Market Shifts—Trend Moves from Expensive Foreign Liquor Towards MML
Liquor Tax Maharashtra ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Liquor Tax Maharashtra: नासिक राज्य उत्पादन शुल्क विभाग द्वारा जारी वित्तीय वर्ष 2025-26 (फरवरी तक) के आंकड़ों ने शराब बाजार के बदलते मिजाज को उजागर किया है। भारी टैक्स और वैट के चलते विदेशी शराब की बिक्री में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है।

क्यों बदला शौकीनों का 'ट्रेंड'?

वहीं, अक्टूबर 2025 में लॉन्च हुए नए विकल्प 'महाराष्ट्र मेड लिकर' (एमएमएल) ने कम समय में ही बाजार का समीकरण बदल दिया है। विदेशी शराब (आईएमएफएल) की कीमतों में जून 2025 से हुई बढ़ोतरी इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण है। राज्य सरकार ने विदेशी शराब पर 10% बैट, 15% लाइसेंस शुल्क और 9% अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया, जिससे कीमतें आसमान छूने लगीं। होटल और रेस्टोरेंट में शराब पर लगे अतिरिक्त शुल्कों ने भी मध्यम वर्ग को सस्ते विकल्पों की ओर मोड़ दिया।

MML: बाजार का नया 'सुपरस्टार'

इंडियन मेड फॉरिन लिकर (आईएमएफएल) के किफायती विकल्प के रूप में आई महाराष्ट्र मेड लिकर (एमएमएल) ने मात्र 5 महीनों में 7,27,302 लीटर की रिकॉर्ड बिक्री की है।

42.8% एबीवी वाली यह शराब अनाज आधारित है और स्थानीय स्तर पर उत्पादित होती है। 180 मिली की पैकिंग में यह विदेशी शराब की तुलना में काफी सस्ती है, जिससे विक्रेताओं और ग्राहकों दोनों में इसकी भारी मांग है।

राजस्व और बाजार का भविष्य

उत्पादन शुल्क विभाग के अनुसार, जहाँ वाइन की बिक्री में मिला-जुला और सकारात्मक रुझान रहा, वहीं विदेशी शराब की गिरावट ने राजस्व संस्वना पर सोचने को मजबूर कर दिया है। विभाग का मानना है कि आने वाले समय में एमएमएल जैसे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से राजस्व का संतुलन फिर से बन सकता है।

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