

Indian Railways Project Delay: नासिक-कल्याण के बीच ईएमयू लोकल ट्रेन सेवा शुरू करने की वर्षों पुरानी मांग पर केंद्र सरकार ने एक बार फिर नकारात्मक रुख अपनाया है। नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे ने लोकसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए रेल मंत्रालय से जवाब मांगा।
हालांकि, मंत्रालय द्वारा दिया गया उत्तर तकनीकी बाधाओं और बिना किसी निश्चित समय सीमा के होने के कारण नासिक और उत्तर महाराष्ट्र के यात्रियों के हाथ एक बार फिर निराशा लगी है।
सांसद वाजे ने अपने प्रश्न में रेखांकित किया कि नासिक रोड से कल्याण के बीच लोकल सेवा केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि जीवन रेखा है। इस मार्ग पर प्रतिदिन हजारों विद्यार्थी, किसान, लघु व्यापारी और दिहाड़ी मजदूर यात्रा करते हैं। एक्सप्रेस ट्रेनों के कई छोटे स्टेशनों पर न रुकने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। पिछले 2 वर्षों में विभिन्न माध्यमों से 10 से 15 बार यह मुद्दा उठाने के बावजूद केंद्र सरकार कोई ठोस निर्णय लेने में विफल रही है।
रेल मंत्रालय ने अपने लिखित उत्तर में नई सेवा शुरू करने में कई बाधाएं गिनाई है- कसारा-कल्याण-सीएसएमटी मार्ग पर पहले से ही 36 उपनगरीय ट्रेने संचालित हैं, जिससे नए 'पाथ' की उपलब्धता चुनौतीपूर्ण है। मंत्रालय के अनुसार, सबसे बड़ी बाधा कसारा-इगतपुरी घाट खंड की सुरंगें है। ईएमयू ट्रेनों की चौड़ाई अधिक होने के कारण वर्तमान बुनियादी ढांचे में इन सुरगों से लोकल चलाना संभव नहीं है। नई सेवा शुरू करना उपलब्ध रोलिंग स्टॉक और भविष्य के तकनीकी अपग्रेडेशन पर निर्भर करता है।
सांसद द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है क्या इन तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए किसी नई स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया जाएगा? सुरंगों की समस्या का वैकल्पिक इंजीनियरिंग समाधान (जैसे ट्रैक को गहरा करना या चौड़ा करना) क्या है? नासिक वासियों को लोकल सेवा की सौगात मिलने की कोई निश्चित समय सीमा क्या है?
नासिक वासियों की पुरानी मांग पर केवल तकनीकी कारणों का हवाला देकर समय बर्बाद किया जा रहा है। हमने कम से कम 10 से 15 बार इसका पीछा किया, लेकिन अब तक कोई ठोस उत्तर नहीं मिला है, जो अत्यंत असतोषजनक है।
- नासिक, सांसद, राजाभाऊ वाजे