

Dowry Harassment Case Nashik: नासिक के जेल रोड परिसर में दहेज की बलि वेदी पर एक और 'आशा' की आहुति चढ़ गई। आशा प्रवीण घोटेकर की आत्महत्या ने समाज में व्याप्त दहेज प्रथा के कुरूप चेहरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है। शादी के समय से ही आशा को उसके ससुराल वालों द्वारा पैसों और ऐशो-आराम के सामान के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। ससुराल पक्ष ने फ्लैट और लग्जरी कार खरीदने के बहाने बार-बार मोटी रकम की मांग की थी, जिसे पूरा करने के लिए आशा के मायके वालों ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था।
आशा के भाई ने अपनी बहन के वैवाहिक जीवन को बचाने के लिए अपनी मां के नाम की पुश्तैनी जमीन तक बेच दी और ससुराल वालों को 25 लाख रुपये नकद सौंपे। इसके अलावा, शादी के समय करीब 21 तोला सोने के आभूषण भी उपहार स्वरूप दिए गए थे। इन सबकी कुल कीमत लगभग 50 लाख रुपये से अधिक थी। लेकिन इतनी संपत्ति मिलने के बाद भी प्रवीण घोटेकर और उसके परिवार का लालच खत्म नहीं हुआ।
नासिक पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, आशा की परेशानी का मुख्य कारण उसके पति प्रवीण घोटेकर के एक अन्य महिला के साथ अवैध संबंध थे। जब भी आशा इसका विरोध करती, उसे शारीरिक और मानसिक रूप से बुरी तरह टॉर्चर किया जाता था। उसे घर के काम और छोटी-छोटी बातों पर अपमानित करना ससुराल वालों की दिनचर्या बन गई थी। पति के इस दोहरे चरित्र ने आशा को भीतर से तोड़ दिया था।
नासिक आत्महत्या मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा अंधविश्वास से जुड़ा है। आरोपियों ने आशा को मानसिक रूप से कमजोर करने के लिए जादू-टोने का सहारा लिया। उसे बार-बार यह कहकर डराया जाता था कि "हम तुम्हें जादू-टोने से मार डालेंगे।" इस तरह के डर और लगातार मिल रही धमकियों के कारण आशा गहरे तनाव में रहने लगी थी। अंततः, कोई रास्ता न देख उसने मौत को गले लगाना बेहतर समझा।
आशा की मौत के बाद उसके भाई ने उपनगरीय पुलिस स्टेशन में न्याय की गुहार लगाई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एफआईआर दर्ज की और आरोपी पति प्रवीण घोटेकर सहित दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले में अन्य रिश्तेदारों की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं। फिलहाल, आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया गया है ताकि मामले की तह तक जाया जा सके।