

Nashik Monsoon Civic Crisis: नासिक शहर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच नगर प्रशासन की गंभीर लापरवाही और उदासीनता के कारण आम नागरिकों का जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
शहर के प्रमुख और व्यस्ततम मार्गों से लेकर पॉश आवासीय परिसरों तक बुनियादी सुविधाओं की पोल खुल चुकी है। सड़कों पर पसरे जानलेवा खतरे, चारों तरफ फैली गंदगी और नलों में आ रहे दूषित पानी के कारण शहरवासियों में भारी रोष व्याप्त है और वे गंभीर दुर्घटनाओं तथा महामारियों की आशंका के साये में जीने को मजबूर हैं।
शहर के अतिव्यस्त माने जाने वाले इंदिरानगर अंडरपास से सिटी सेंटर मॉल तक जाने वाले प्रमुख मार्ग पर पिछले कई दिनों से एक विशाल पेड़ उखड़कर गिरा पड़ा है। हालांकि प्रशासनिक टीमों ने औपचारिकता निभाते हुए पेड़ का ऊपरी हिस्सा तो हटा दिया है, लेकिन उसका भारी-भरकम और खतरनाक ठूंठ अभी भी बीच सड़क पर जस का तस बना हुआ है, जो वाहन चालकों के लिए बड़े हादसों का बुलावा साबित हो रहा है।
स्थिति तब और अधिक भयावह हो जाती है जब इसी मार्ग पर एक अन्य जर्जर और सूखा पेड़ केवल महाराष्ट्र नेचुरल गैस लिमिटेड की गैस पाइपलाइन के पत्थरों और कमजोर मलबे के सहारे संतुलन बनाए हुए है।
यह जर्जर पेड़ कभी भी धराशायी होकर किसी बड़े हादसे को दावत दे सकता है। दूसरी ओर, हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश के चलते इस महत्वपूर्ण मार्ग का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया है, जिसके कारण यातायात पहले से ही एकतरफा और जोखिम भरा चल रहा है।
भारी बारिश के मौसम में इन जर्जर पेड़ों, सड़क के गड्डों और घंसे हुए हिस्सों के कारण जानलेवा हादसों की आशंका कई गुना बढ़ गई है। इसके बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधि और नगर निगम प्रशासन इस गंभीर समस्या पर पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं और किसी बड़े अनर्थ के होने का इंतजार कर रहे हैं।
सड़क मार्ग की बदहाली के साथ-साथ शहर के उच्चभ्रू और पॉश इलाकों का हाल भी बेहद बदतर हो चुका है। शहर के प्रतिष्ठित गोविंद नगर इलाके में जॉगिंग ट्रैक के आसपास और अन्य आवासीय परिसरों में नियमित साफ-सफाई और कचरा उठान न होने के कारण भारी गंदगी का साम्राज्य फैल गया है।
लगातार हो रही बारिश के पानी में कचरा और मलबा सड़ने के कारण सड़कों और गलियों में तीव्र दुर्गंध फैल रही है। जगह-जगह जलभराव और सड़ते कचरे के ढेरों की वजह से मच्छरों, मक्खियों और अन्य कीटों की उत्पत्ति बेकाबू रूप से बढ़ रही है। इस अस्वच्छता के चलते पूरे क्षेत्र में डेंगू, मलेरिया, चिकुनगुनिया और टाइफाइड जैसी संक्रामक व जानलेवा बीमारियों के फैलने का प्रबल खतरा पैदा हो गया है, जिससे रहवासियों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया है।
बारिश के दिनों में बदहाल जलापूर्ति प्रणाली ने नागरिकों की मुसीबतों को और बढ़ा दिया है। स्थानीय नागरिकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया है कि पिछले कुछ दिनों से जारी बारिश के चलते शहर के कई इलाकों में नगर निगम द्वारा नलों के जरिए सीधे तौर पर दूषित, मटमैला और बदबूदार पानी सप्लाई किया जा रहा है।
पीने के पानी की लाइनों में सीवर का गंदा पानी मिश्रित होकर आने से नागरिकों के स्वास्थ्य पर सीधा और प्रतिकूल असर पढ़ रहा है। इस दूषित जल के सेवन से हैजा, पीलिया, डायरिया, टाइफाइड और पेट के गंभीर संक्रमण जैसी जलजनित बीमारियां फैलने की आशंका से रहवासी बेहद भयभीत और आशंकित है।
शहरवासियों, विभिन्न सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन और महानगरपालिका से पुरजोर मांग की है कि किसी बड़े हादसे या स्वास्थ्य आपातकाल के घटने का इंतजार किए बिना, तुरंत युद्धस्तर पर कदम उठाए जाएं।
नागरिकों ने मांग की है कि सड़कों से तत्काल जर्जर व गिरे हुए पेड़ और ठूंठ हटाए जाएं, धंसी हुई सड़कों की मरम्मत हो, नालियों की नियमित सफाई कराई जाए और शहरवासियों को शुद्ध पेयजल की सुचारू आपूर्ति हर हाल में सुनिश्चित की जाए,