नियमों का उल्लंघन करने वाले मंडलों पर होगी कार्रवाई, ढोल-ताशा और ‘साउंड वॉल’ का जमकर हुआ इस्तेमाल
Nashik Ganesh Visarjan: नाशिक गणेश विसर्जन जुलूस में ढोल-ताशा और साउंड वॉल का जमकर इस्तेमाल हुआ। कई मंडलों ने नियम तोड़े, पुलिस ने मामले दर्ज किए लेकिन बड़ी कार्रवाई अब तक नहीं हुई।
- Written By: अर्पित शुक्ला
गणेस विसर्जन
Nashik News: “गणपती बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या!” के जयघोष के साथ नाशिक का गणेश विसर्जन जुलूस भारी बारिश, ढोल-ताशों की गड़गड़ाहट, लेजिम और कान फाड़ने वाले डीजे की ध्वनि के बीच पूरे उत्साह के साथ संपन्न हुआ। पुलिस प्रशासन ने जुलूस के लिए कुछ प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन कई मंडलों ने इन नियमों का उल्लंघन किया। इन मंडलों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
जुलूस में दिखी पारंपरिक कलाओं की झलक
पिछले कुछ सालों में नाशिक का सार्वजनिक गणेश विसर्जन जुलूस मुंबई और पुणे की बराबरी पर आ गया है। इस साल के जुलूस में पारंपरिक वाद्ययंत्रों के अलावा ढोल-ताशों की गूंज, लेजिम का प्रदर्शन और लाठी-काठी सहित विभिन्न शिवकालीन युद्ध कलाओं का प्रदर्शन किया गया। शिवसेना युवा मंडल ने जुलूस में शिवलिंग पर आधारित अघोरी नृत्य भी प्रस्तुत किया, जिसे हरियाणा के कलाकारों ने पेश किया। इस दौरान नीले रंग के शंकर, काली माता और पार्वती माता पर आधारित हिंदी गीतों पर नृत्य, शिव तांडव और रोमांचक करतब भी दिखाए गए।
कुछ मंडलों ने बेंजो का सहारा लिया, जबकि अन्य ने ढोल समूहों को प्राथमिकता दी। ढोल समूहों ने रुद्रनाद, महाकाल और देवी के गीतों पर विभिन्न ताल बजाए। बारिश के कारण ढोल-ताशों की आवाज थोड़ी कम हो गई थी।
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नियमों का उल्लंघन और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने मंडलों को केवल एक ढोल समूह रखने और उसमें 70 से अधिक सदस्य न होने का निर्देश दिया था, लेकिन कुछ मंडलों ने दो-दो ढोल समूह रखे। जुलूस में देरी न हो, यह बताने के बावजूद कई जगहों पर वादन देर तक चलता रहा। देर रात पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने आदेश जारी किया कि पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ जुलूस रात 12 बजे तक जारी रहेगा। लेकिन अधिकांश मंडल रात 12 बजे तक रविवार कारंजा इलाके में पहुंच गए थे। चार मंडलों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ वादन किया। कुछ मंडलों ने रात 12 बजे के बाद रविवार कारंजा में ढोल बजाना बंद कर दिया और आगे बढ़ गए।
पुलिस की चेतावनी के बावजूद कुछ मंडलों ने तेज आवाज वाले डीजे (‘साउंड वॉल’) का इस्तेमाल किया। ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करते हुए भी तेज आवाज जारी रही। इनमें राजनीतिक दलों से जुड़े शिवमुद्रा मित्र मंडल, मानाचा राजा, युवक मित्र मंडल, दंडे हनुमान मंडल, रोकडोबा मित्र मंडल और युनाइटेड मित्र मंडल जैसे मंडल शामिल थे, जिन्होंने तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल किया। ‘उड़ल्या चाळीच्या’ गाने पर कार्यक्रमसिंह मंडल के पदाधिकारी और भक्त जमकर थिरके।
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नियमों का उल्लंघन करने वाले इन गणेश मंडलों के खिलाफ पुलिस थानों में मामला दर्ज किया जा रहा है। पिछले कुछ सालों से विसर्जन जुलूस में नियम तोड़ने वाले मंडलों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाते हैं, लेकिन इसके अलावा कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होती, जिसकी वजह से मंडल पुलिस के निर्देशों को नजरअंदाज करते नजर आते हैं।
