

Nashik Education Ranking: राष्ट्रीय शैक्षणिक मूल्यांकन यानी केंद्र सरकार के परफॉर्मिंग ग्रेडिंग इंडेक्स - डिस्ट्रिक्ट (PGI-D) में नासिक जिला पिछड़ गया है और राज्य में 12वें स्थान पर खिसक गया है। खुद शिक्षा मंत्री के गृह जिले में शैक्षणिक रैंकिंग में आई इस गिरावट को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने तत्काल समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को मूल्यांकन के प्रत्येक बिंदु पर सूक्ष्म नियोजन (माइक्रो-प्लानिंग) कर अंक सुधारने के कड़े निर्देश दिए। PGI-D में नासिक के पिछड़ने की पृष्ठभूमि में शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने सोमवार 10 अगस्त को नासिक जिलाधिकारी कार्यालय में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक बुलाई।
इस बैठक में ऑनलाइन माध्यम से मंत्री नरहरी झिरवाल, विधायक हीरामन खोसकर, विधायक नितिन पवार, विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल, जिलाधिकारी आयुष प्रसाद और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओंकार पवार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री भुसे ने कहा कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता का विभिन्न मानदंडों पर लगातार मूल्यांकन किया जाता है। पिछले वर्ष की तुलना में नासिक के अंकों में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन राज्य में 12वां स्थान पाना संतोषजनक नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मूल्यांकन के मुख्य मानदंडों में छात्रों की पढ़ने, लिखने और बुनियादी गणित की क्षमता शामिल है। इसलिए जिन बिंदुओं पर नासिक पीछे रहा है, उन्हें चिन्हित कर स्कूल-वार और छात्र-वार काम करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से कुछ छात्रों की पठन क्षमता अपेक्षित स्तर पर न पाए जाने के कारण इस विषय पर गंभीरता से ध्यान देने को कहा गया है। अब शिक्षा विभाग जिले के प्रत्येक स्कूल का एक अलग चार्ट तैयार करेगा, जिससे यह पता लगाया जा सके कि किस स्कूल में कौन सी सुविधा या शैक्षणिक कमी है। उसी के अनुसार प्राथमिकता तय करके फंड और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा पेयजल, शौचालय, स्कूल भवन की मरम्मत, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, ई-सुविधाएं, खेल का मैदान और सुरक्षा दीवार जैसी भौतिक सुविधाओं को भी पूरा करने पर जोर दिया जाएगा।
शैक्षणिक मूल्यांकन में कोल्हापुर जिले ने पिछले वर्ष राज्य में शीर्ष स्थान हासिल किया था। भुसे ने निर्देश दिए कि नासिक के प्रदर्शन को सुधारने के लिए केवल कागजी खानापूर्ति न की जाए, बल्कि छात्रों की प्रत्यक्ष शैक्षणिक प्रगति पर ध्यान केंद्रित किया जाए। इसके साथ ही, प्रत्येक जिले में आनंद क्रीड़ा प्रबोधिनी शुरू करने की योजना बनाई जा रही है और स्कूल, केंद्र, तहसील व राज्य स्तर पर अटल क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। हैप्पी सैटरडे के साथ इन्फॉर्मेशन सैटरडे पहल भी लागू की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासनिक बोझ घटाने के लिए पहले की 14 समितियों के स्थान पर अब केवल चार समितियां बनाई गई हैं और विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यक जानकारी केवल शनिवार के दिन ही मांगी जाए।