

नाशिक की मध्यवर्ती बाजारपेठ में पहले दिन ही नो व्हीकल जोन बेअसर।
बैरिकेड के बावजूद दोपहिया और चारपहिया वाहन प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंचे।
गोरेराम लेन, दूध बाजार और दहीपुल सहित संकरी गलियों से हुई वाहनों की आवाजाही।
कई जगह पुलिस ने दंडात्मक कार्रवाई के बजाय मौखिक चेतावनी देकर वाहन छोड़े।
भीड़ के बीच महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी उठानी पड़ी।
Nashik Diwali Market No Vehicle Zone Traffic Failure: दिवाली की खरीदारी के लिए नासिक की मध्यवर्ती बाजारपेठ में उमड़ी भीड़ के बीच नो व्हीकल जोन व्यवस्था पहले ही दिन बेअसर नजर आई। प्रतिबंध के बावजूद दोपहिया और चारपहिया वाहन बैरिकेड पार कर और अंदरूनी गलियों से बाजार में पहुंचते रहे। इससे जाम लगा और पैदल खरीदारी करने आए लोगों को परेशानी हुई।
नासिक, दिवाली की खरीदारी के लिए मध्यवर्ती बाजारपेठ में उमड़ रही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से घोषित नो व्हीकल जोन व्यवस्था पहले ही दिन बेअसर साबित हुई। वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध के बावजूद दोपहिया और चारपहिया वाहन बैरिकेड पार कर तथा वैकल्पिक गलियों से सीधे बाजारपेठ में पहुंचते रहे।
इससे खरीदारों की भीड़ के बीच यातायात जाम की स्थिति बन गई। पैदल खरीदारी करने आए नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी उठानी पड़ी। पहले ही दिन सामने आई स्थिति ने पुलिस की योजना और प्रतिबंध के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिवाली की खरीदारी के लिए बाजारपेठ में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए यातायात विभाग के उपायुक्त ने 3 से 11 नवंबर तक सुबह 8 से रात 10 बजे तक प्रमुख मार्गों पर वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है।
शालिमार, रविवार कारंजा, धुमाल पॉइंट और गोदाकाठ परिसर सहित बाजारपेठ के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर वाहनों की आवाजाही रोकने की व्यवस्था की गई थी। मुख्य प्रवेश द्वारों पर यातायात पुलिस ने बैरिकेड भी लगाए थे।
मुख्य रास्तों पर रोक के बावजूद कुछ वाहन चालकों ने अंदरूनी गलियों का इस्तेमाल कर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया। गोरेराम लेन, दूध बाजार, दहीपुल, तिबंधा, कानडे मारुति लेन, फावडे लेन, सरस्वती लेन और शुक्ल गली जैसे संकरे रास्तों से दोपहिया और चारपहिया वाहन बाजारपेठ में आते-जाते रहे।
पहले से खरीदारों की भीड़ से भरी इन संकरी सड़कों पर वाहनों के कारण जाम लग गया। कई स्थानों पर पैदल चलने वालों के लिए रास्ता तक नहीं बचा। नागरिकों को वाहनों के बीच से निकलकर खरीदारी करनी पड़ी।
नो व्हीकल जोन में प्रवेश करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई अपेक्षित थी। हालांकि, नागरिकों के अनुसार, कई स्थानों पर पुलिसकर्मियों ने केवल मौखिक चेतावनी देकर वाहन चालकों को जाने दिया।
प्रमुख चौराहों और प्रवेश मार्गों पर पुलिसकर्मी तैनात होने के बावजूद वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो सका। परिवार के साथ खरीदारी करने पहुंचे नागरिकों ने व्यवस्था पर नाराजगी जताई।
पहले ही दिन की अव्यवस्था के बाद अब पुलिस प्रशासन के सामने नो व्हीकल जोन को प्रभावी तरीके से लागू करने की चुनौती है। अंदरूनी गलियों पर निगरानी बढ़ाने और प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि दिवाली की भीड़ के बीच पैदल खरीदारों को सुरक्षित और सुगम रास्ता मिल सके।