Nashik Summer Water Crisis ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Summer Water Crisis: नासिक फरवरी का महीना बीतने के साथ ही नासिक जिले में भीषण गर्मी की आहट सुनाई देने लगी है। जिले के बड़े डैम और पानी के प्रोजेक्ट में पानी का लेवल तेजी से गिर रहा है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जिले के बड़े, मीडियम और छोटे जलाशयों में इस्तेमाल करने लायक पानी का सिर्फ 72.30 प्रतिशत ही बचा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नासिक शहरवासियों की प्यास बुझाने वाले गंगापुर डैम में अभी 51,000 एमसीएफटी पानी मौजूद है, जो इसकी कुल कैपेसिटी का 65.56 प्रतिशत है।
वहीं, पालखेड़ डैम में हालात काफी बेहतर हैं, जहां सबसे ज्यादा 92.40 प्रतिशत पानी का स्टोरेज मौजूद है। हालांकि पिछले साल अच्छी बारिश की वजह से ज्यादातर डैम में 50 प्रतिशत से ज्यादा पानी है।
लेकिन जिले के कुछ हिस्सों में विता अभी से बढ़ने लगी है। नांदगांव, येवला, पेठ, त्र्यंबकेश्वर और सुरगाणा इलाकों में मार्च से पानी की कमी होने की संभावना है। इन इलाकों में प्रशासन को टैंकरों से पानी सप्लाई करना पड़ सकता है।
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बढ़ती गर्मी और इवैपोरेशन (वाध्धीकरण) की वजह से वाटर लेवल और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, इसे देखते हुए, डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ने अभी से वाटर प्लानिंग’ और वाटर कंजर्वेशन पर जोर देना शुरू कर दिया है ताकि आने वाले महीनों में हालात गभीर न हो।
गर्मी के मौसम में डेमी में पानी कम हो जाने की वजह से यहां के स्थानीय लोगों को पेयजल की भारी किल्लत का सामना करना पड़ता है, नासिक जिले की वाई तहसीलों में टैंकर के माध्यम से पानी की सप्लाई करनी पड़ती है जिसकी वजह से नागरिकों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाता है, हालांकि जिले की प्यास बुझाने का काम करने वाली है लेकिन डेमों में अभी पानी है कहा जा रहा है कि अप्रैल के महीने से पानी की कटौती करनी शुरू कर दी जाएगी।