Nashik: विकास या विनाश? सिंहस्थ की तैयारियों और मिसमैनेजमेंट ने नागरिकों का जीना किया मुहाल

Road Construction Issue: नासिक में 30,000 करोड़ के विकास कार्यों और सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों ने शहर को धूल और जाम के मलबे में झोंक दिया है। प्रशासन के खराब तालमेल से हादसे भी बढ रहे है।
Nashik: Development or Destruction? Simhastha Preparations and Mismanagement Make Life Miserable for Citizens.
नासिक ट्रैफिक समस्या (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Road Construction Issue Nashik: शहर इन दिनों विकास की भारी कीमत चुका रहा है। आगामी सिंहस्थ कुंभमेले के नाम पर शहर की सूरत बदलने के लिए लगभग 30,000 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है, लेकिन धरातल पर योजनाबद्ध तरीके से काम होने के बजाय केवल अफरातफरी का माहौल दिख रहा है। प्रशासन के 'मिसमैनेजमेंट' के कारण आज नाशिक की पहचान एक सुव्यवस्थित शहर से बदलकर 'धूल, जाम और हादसों के शहर' के रूप में होने लगी है।

सड़कों पर बना अराजकता का माहौल

शहर के मुख्य मार्गों से लेकर आंतरिक गलियों तक, बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक खुदाई शुरू कर दी जा रही है। महानगरपालिका, जल आपूर्ति विभाग और बिजली कंपनियों के बीच समन्वय की भारी कमी साफ नजर आती है। एक विभाग सड़क बनाता है, तो दूसरा पाइपलाइन या केबल डालने के लिए उसे दोबारा खोद देता है। इस आपसी तालमेल के अभाव के कारण न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है, बल्कि शहर भर की सड़कें गड्ढों के अंबार में तब्दील हो गई हैं।

ट्रैफिक जाम और बढ़ते हादसे

खुदाई के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं, लेकिन वैकल्पिक मार्गों या ट्रैफिक डायवर्जन की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। सुबह और शाम के पीक आवर्स में ट्रैफिक जाम इतना भयावह हो जाता है कि नागरिकों को अपने गंतव्य तक पहुँचने में सामान्य से तीन गुना अधिक समय लग रहा है। सड़कों पर पर्याप्त सूचना फलक, उचित बैरिकेडिंग और रात के समय रिफ्लेक्टर या प्रकाश व्यवस्था न होने से दुर्घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। दोपहिया वाहन चालक विशेष रूप से फिसलन और खुले गड्ढों के कारण अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।

व्यापार और स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार

विकास की इस 'धूल' ने नासिक के व्यापारियों और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाला है। उड़ती धूल और मलबे के कारण सड़कों के किनारे स्थित दुकानों तक ग्राहकों की पहुँच कम हो गई है, जिससे व्यापार चौपट हो रहा है। वहीं, वातावरण में फैली धूल के कारण सांस और आंखों से संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। प्रशासन को समझना होगा कि विकास कार्यों का उद्देश्य नागरिकों को सुविधा देना है, न कि उन्हें संकट में डालना।

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