कुंभ की तैयारियों के बीच नंदिनी नदी पर संकट, राजेश पंडित ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

Nashik Nandini River: नासिक में कुंभ मेले के नाम पर नंदिनी नदी का प्राकृतिक प्रवाह बदलने का विवाद गहराया। जनहित याचिकाकर्ता राजेश पंडित ने हाईकोर्ट के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
Controversy erupted in Nashik as PIL petitioner Rajesh Pandit accused administration of altering Nandini River's natural flow ahead of the upcoming Kumbh Mela.
नंदिनी नदी (फोटो- सोशल मीडिया)
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Nashik Nandini River Godavari confluence: आगामी सिंहस्थ कुंभमेले के नाम पर नासिक में पर्यावरण और नदी संरक्षण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जनहित याचिकाकर्ता राजेश पंडित ने आरोप लगाया है कि कुंभमेले की तैयारियों के चलते 'नंदिनी नदी' के प्राकृतिक प्रवाह को कृत्रिम रूप से बदला जा रहा है, जिससे गोदावरी के साथ इसके प्राकृतिक संगम पर संकट पैदा हो गया है। उन्होंने मंडलायुक्त और कुंभमेला प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ। प्रवीण गेडाम को ज्ञापन सौंपकर इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

क्या हैं मुख्य आरोप ?

राजेश पंडित ने अपने ज्ञापन में नदी के अस्तित्व को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं-आरोप है कि नदी के पानी को पंपिंग के माध्यम से मोड़कर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की ओर भेजा जा रहा है, जिससे वर्ष के आठ महीने नदी गोदावरी में नहीं मिल पाती। यह केवल वर्षाकाल में ही अपने प्राकृतिक स्वरूप में बह पाती है। इस पूरी प्रक्रिया में पर्यावरणीय नियमों, नीरी के दिशा-निर्देशों और मुंबई उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है।

नदी का प्रवाह बदलने से न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि संगम का धार्मिक महत्व भी प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन के जरिए प्रशासन से कई तीखे सवाल पूछे गए हैं- नदी का पानी मोड़ने के पीछे का वास्तविक उद्देश्य क्या है? अंबड-सातपुर क्षेत्र में प्रस्तावित एसटीपी परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति क्या है? नदी में बढ़ते प्रदूषण के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? कुंभमेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?

नदी का पानी मोड़ने पर मचा सियासी-प्रशासनिक बवाल

राजेश पंडित ने मांग की है कि इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति की आपातकालीन बैठक बुलाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कुंभमेले की तैयारियों के नाम पर नदी के प्राकृतिक अस्तित्व को नष्ट करने का प्रयास जारी रहा, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने नासिक महानगरपालिका, जिला प्रशासन, पुलिस आयुक्त, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल और जलसंपदा विभाग को इस मामले में संज्ञान लेने का आग्रह किया है। इस नए विवाद ने कुंभमेला पूर्व तैयारियों के कार्यों को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

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