सांसद शोभा बच्छाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Agriculture News: बेमौसम बारिश, बाजार की अस्थिरता और वैश्विक युद्धजन्य परिस्थितियों के कारण उत्तर महाराष्ट्र का किसान आज तिहरे संकट में फंसा हुआ है। यदि केंद्र सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप कर विशेष पैकेज की घोषणा नहीं की, तो क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। यह गंभीर चेतावनी धुलिया लोकसभा क्षेत्र की कांग्रेस सांसद डॉ. शोभा बच्छाव ने संसद में कृषि विषय पर चर्चा के दौरान दी। 50 सब्सिडी निर्यात पर प्याज और कपास उत्पादकों का मुद्दा गरमाया
चर्चा में भाग लेते हुए डॉ. शोभा बच्छाव ने सदन का ध्यान उत्तर महाराष्ट्र के किसानों की दयनीय स्थिति की ओर आकर्षित किया। निर्यात ठप होने और अंतरराष्ट्रीय युद्ध की स्थिति के कारण प्याज उत्पादकों को अपना माल कौड़ियों के दाम बेचना पड़ रहा है, जबकि उत्पादन लागत 200 से 300 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
धुलिया और जलगांव जिलों में कपास, सोयाबीन और मक्का उत्पादक किसान हताश हैं क्योंकि बाजार भाव उत्पादन लागत से भी नीचे गिर गए हैं। नासिक के अंगूर और जलगांव के केला उत्पादक किसान जलवायु परिवर्तन और युद्ध के कारण निर्यात बाधित होने से दोहरी मार झेल रहे हैं।
सांसद ने सदन को अवगत कराया कि जनवरी और फरवरी 2026 में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण उत्तर महाराष्ट्र में 50 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसलों का भारी नुकसान हुआ है। इसके बावजूद किसानों को अभी तक पर्याप्त राहत नहीं मिली है। सांसद ने सरकार के सामने रखी गई प्रमुख मांगें डॉ. शोभा बच्छाव ने किसानों को संकट से उबारने के लिए निम्नलिखित ठोस कदम उठाने की मांग की।
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संकटग्रस्त किसानों को तत्काल वित्तीय सहायता देने के लिए विशेष पैकेज घोषित किया जाए। युद्ध के कारण बढ़े हुए परिवहन खर्च को वहन करने के लिए सरकार निर्यात पर 50 प्रतिशत सीधी सब्सिडी दे।
प्याज को न्यूनतम समर्थन मूल्य के दायरे में लाया जाए और किसानों को उचित ‘हमीभाव मिलना अनिवार्य किया जाए। नाफेड और सीसीआई के केंद्र बढ़ाकर कपास, सोयाबीन और मक्का की 100 प्रतिशत खरीदारी सुनिश्चित की जाए। डॉ. शोभा बच्छाव ने अंत में भावुक अपील करते हुए कहा कि किसान देश का अन्नदाता है और उसे इस संकट से उबारना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।