चुनावी हलचल के बीच मानवता की मिसाल: दिव्यांग किसान की पीड़ा सुन जमीन पर बैठे विधायक हिरामण खोसकर

Nashik Farmer Land Dispute: नासिक कलेक्ट्रेट में चुनावी हलचल के बीच एनसीपी विधायक हिरामण खोसकर ने जमीन पर बैठकर एक दिव्यांग किसान की पीड़ा सुनी और फर्जीवाड़े के खिलाफ न्याय दिलाने का भरोसा दिया।
Amid election buzz at Nashik Collectorate, MLA Hiraman Khoskar sat on the floor to comfort a disabled farmer whose land was grabbed using a fake power of attorney.
विधायक हिरामण खोसकर (फोटो.सोशल मीडिया)
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Nashik Collectorate Hiraman Khoskar: एक तरफ जहां कलेक्ट्रेट परिसर में विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल और नामांकन वापसी का ड्रामा चल रहा था, वहीं दूसरी तरफ मानवता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने सबका ध्यान खींच लिया। राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक हिरामण खोसकर ने चुनावी भागदौड़ को दरकिनार कर लाखलगांव के एक दिव्यांग किसान मधुकर कांडेकर की समस्या को न केवल सुना, बल्कि जमीन पर बैठकर उन्हें ढांढस भी बंधाया।

मधुकर कांडेकर, जो दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, अपनी जमीन के विवाद को लेकर न्याय की आस में कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उनका आरोप है कि ओढा क्षेत्र में स्थित उनकी करीब दो एकड़ जमीन किसी ने फर्जी मुखत्यार पत्र (पावर ऑफ अटॉर्नी) तैयार कर हड़प ली है। वे काफी समय से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन चुनावी व्यस्तता के कारण उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही थी।

विधायक ने दिखाया संवेदनशीलता का परिचय

कलेक्ट्रेट परिसर में जब विधायक हिरामण खोसकर की नजर मधुकर कांडेकर पर पड़ी, तो वे बिना किसी औपचारिकता के सीधे उनके पास गए और वहीं जमीन पर बैठ गए। उन्होंने न केवल किसान की समस्या को विस्तार से समझा, बल्कि उन्हें आश्वासन दिया कि वे उनके पुराने मित्र हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

क्या मेरी यह पीड़ा लोगों तक पहुंचेगी ?

इस भावुक पल ने वहां मौजूद लोगों और पत्रकारों को झकझोर कर रख दिया। मधुकर कांडेकर ने जब पत्रकारों से यह मासूम सवाल पूछा कि क्या मेरी यह पीड़ा लोगों तक पहुंचेगी?, तो वहां मौजूद हर शख्स गंभीर हो गया। राजनीति के शोर-शराबे के बीच एक दिव्यांग किसान की न्याय की यह गुहार समाज को आईना दिखाने के लिए काफी थी।

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