

Nashik Mhada Scam Municipal Corporation: म्हाडा घोटाले में नाम सामने आने के बाद अचानक महानगरपालिका से गायब हुए प्रमुख इंजीनियर अब एक बार फिर चुपचाप अपनी कुर्सियों पर लौट आए हैं। करीब 10 से 15 दिनों तक बिना किसी स्पष्ट सूचना के अनुपस्थित रहने वाले इन अधिकारियों की वापसी ने मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच की तलवार लटकने के बावजूद संबंधित अधिकारियों को दोबारा उसी पद पर काम करने की अनुमति कैसे दी गई, इसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
मामले को लेकर शिवसेना (उबाठा) गुट ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। गुटनेता केशव पोरजे ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल पदमुक्त करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो शिवसेना स्टाइल में तीव्र आंदोलन किया जाएगा। पोरजे ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों के नाम घोटाले में सामने आए हैं, उन्हें संरक्षण देने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले को देखते हुए नासिक शहर में हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। ऐसे महत्वपूर्ण समय में प्रमुख इंजीनियरों का अचानक गायब हो जाना शहर के विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर डालने वाला साबित हुआ। कई परियोजनाओं की प्रक्रिया प्रभावित हुई और प्रशासनिक कामकाज की गति भी धीमी पड़ी। विपक्ष का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम से महानगरपालिका और सभी 122 नगरसेवकों की छवि धूमिल हुई है।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारियों ने अनुपस्थिति के दौरान न तो कोई पूर्व सूचना दी और न ही अवकाश आवेदन प्रस्तुत किया। इसके बावजूद अब वे पिछले दो-तीन दिनों से फिर से अपने कार्यभार संभालते नजर आ रहे हैं। इस घटनाक्रम से जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि जांच चल रही है तो संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील पदों से हटाना चाहिए था।
वहीं, मनपा प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन की चुप्पी से संदेह और गहरा गया है।नासिक शहर में चर्चा है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रंग पकड़ सकता है।