

Manoj Jarange Maratha Reservation: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर जालना के अंतरवाली सराटी में मनोज जरांगे पाटिल के आमरण अनशन का शुक्रवार को 7वां दिन था।
इससे पहले सरकार के प्रतिनिधिमंडल के रूप में मंत्री उदय सामंत, राधाकृष्ण विखे पाटिल और प्रसाद लाड की जरांगे पाटिल के साथ लगभग ढाई घंटे लंबी चर्चा बेनतीजा रही।
मनोज जरांगे पाटिल ने सरकार के सामने मराठा आरक्षण से जुड़ी सभी मांगों को स्वीकार करने के लिए 11 सितंबर तक की समयसीमा तय की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक वे आमरण अनशन समाप्त नहीं करेंगे।
सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी चर्चा के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकलने से जरांगे का रुख और सख्त हो गया है। उन्होंने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग करते हुए कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं होती। इस अल्टीमेटम के बाद सरकार पर आंदोलन खत्म कराने का दबाव बढ़ गया है।
मनोज जरांगे पाटिल ने आंदोलन को और तेज करने के संकेत देते हुए मराठा समाज से मुंबई पहुंचने की तैयारी करने का आह्वान किया है। इसके बाद अंतरवाली सराटी में उनके समर्थन में बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे हैं। आंदोलन को मिल रहे व्यापक समर्थन के बीच सकल मराठा समाज ने सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के इस्तीफे की मांग उठाई है।
समाज का आरोप है कि मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सरकार की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। जरांगे के आह्वान और बढ़ती भीड़ से आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
नासिक में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मराठा समन्वयक करण गायकर ने आरक्षण उपसमिति के अध्यक्ष विखे पाटिल को मराठा विरोधी बताते हुए उन्हें तुरंत मराठा आरक्षण के संदर्भ में गठित सरकारी समिति से हटाने की मांग की है।
गायकर ने कहा कि विखे पाटिल समाज को गुमराह कर रहे हैं और उन्होंने एसईबीसी आरक्षण पर कोई काम नहीं किया। इसलिए वे खुद इस्तीफा दें या सीएम उनका इस्तीफा लें।