मालेगांव में प्याज की खेती में भारी गिरावट, 60 हजार हेक्टेयर कम रकबा; किसान मक्का-चना की ओर मुड़े

Onion farming crisis: नवंबर की बारिश, पौधों की कमी और सही दाम न मिलने से मालेगांव सहित जिले में प्याज की खेती 55 से 60 हजार हेक्टेयर घट गई है। किसान अब मक्का, गेहूं और चना उगा रहे हैं।
Onion cultivation in Malegaon sees a sharp decline, with 60,000 hectares less area under cultivation; farmers shift to maize and chickpeas
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
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Malegaon Agriculture Nashik Onion Farmers: मालेगांव पिछले साल 15 तालुका में दो लाख हेक्टेयर में प्याज की खेती हुई थी। लेकिन, 21 जनवरी तक प्याज का रकबा 55 से 60 हजार हेक्टेयर कम हो गया है। प्याज की पौध नवंबर में हुई बारिश की वजह से प्याज की खेती पर असर पड़ा है। किसानों ने प्याज की जगह मक्का, गेहूं, चना और सब्जी की फसलें उगानी शुरू कर दी हैं।

इस वजह से पिछले साल के मुकाबले इस साल प्याज की खेती में भारी गिरावट आई है। जिले में सबसे ज्यादा गर्मियों की प्याज की खेती होती है। लेकिन, यहां के किसानों को दिसंबर तक प्याज का सही दाम नहीं मिला। धान के खेतों में लगाए गए प्याज को मनचाहा दाम नहीं मिलने से किसान परेशान हैं क्योंकि 2025 में पौधे निकलने वाले हैं।

इसलिए, इस साल गर्मियों की प्याज की तरफ किसानों का रुझान कुछ हद तक कम हुआ है। नवंबर की शुरुआत में बारिश की वजह से प्याज की पौध खराब हो गई थी। बीज की कमी की वजह से किसानों ने दूसरा रास्ता अपनाया है। पिछले साल, बगलान तहसील में सबसे ज्यादा प्याज की खेती 52 हजार 124.67 हेक्टेयर में हुई थी।

अभी, 38 हजार 200 हेक्टेयर में प्याज की खेती हो रही है। जनवरी के दूसरे हफ़्ते में, जिले में 1 लाख 45 हजार 570।20 हेक्टेयर में प्याज की खेती हुई थी। पौधों की कमी और बढ़ते दामों की वजह से, किसानों का रुझान दूसरी फ़सल उगाने की तरफ बढ़ गया है।

बेमौसम बारिश की वजह से खराब हो गए पौधे

पिछले साल, प्याज के दाम नहीं बढ़े थे। इस वजह से, किसानों का प्याज खेत में ही खराब हो गया था। नवंबर 2025 के पहले हफ़्ते तक बारिश होती रही। किसानों ने खेतों में पौधे तैयार कर लिए थे। वापिस आई बारिश की वजह से पौधे खराब हो गए। जिसकी वजह से किसानों को नुकसाना उठाना पड़ा था।

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