संघर्ष समिति का आरोप: मालेगांव मनपा के प्रशासकीय कार्यकाल पर श्वेतपत्र की मांग

Malegaon Public Accountability: मालेगांव महानगरपालिका के प्रशासकीय कार्यकाल पर सवाल उठे हैं। विधायक संघर्ष समिति ने 2022-26 के कामकाज पर श्वेतपत्रिका जारी करने की मांग की है।
Struggle Committee's allegation: Demand for a white paper on the administrative tenure of Malegaon Municipal Corporation
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Malegaon Municipal Administrator Rule: मालेगांव महानगरपालिका के प्रशासकीय कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों को लेकर शहर में असंतोष का माहौल गहराता जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में 'मालेगांवकर विधायक संघर्ष समिति' की ओर से उस पूरे कार्यकाल की विस्तृत श्वेतपत्रिका सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

इस संबंध में समिति ने महापौर शेख नसरीन बानो मो। खालिद तथा उपमहापौर शान-ए-हिंद निहाल अहमद से भेंट कर अपनी भूमिका स्पष्ट की। लोकप्रतिनिधि मंडल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 16 जून 2022 से 6 फरवरी 2026 तक महानगरपालिका पर प्रशासक के रूप में आयुक्त की नियुक्ति की गई थी।

समिति का आरोप है कि इस अवधि में प्रशासन को प्राप्त विशेष अधिकारों का दुरुपयोग किया गया। आर्थिक फैसलों और शहरहित की योजनाओं में पारदर्शिता और अनुशासन को दरकिनार किया गया। कई विकास कार्यों में अवाजवी दरें वसूलने और निर्माण कार्य की गुणवत्ता खराब होने के दावे किए गए हैं।

इन विवादित कार्यों की जांच की मांग हुई तेज

समिति ने मुख्य रूप से डोर-टू-डोर कचरा संकलन ठेका, भूमिगत गटर योजना, सीमेंट सड़कों का निर्माण, शिवतीर्थ सौंदर्याकरण और मोसम नदी से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर प्रश्नचिहन खड़े किए है। प्रदूषण के मामले में मालेगांव के 'रेड जोन में होने के बावजूद पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस उपाय न करने का आरोप भी प्रशासन पर लगा है। इसके अलावा, वृक्षारोपण, यातायात व्यवस्था और पार्किंग नियोजन में विफलता की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।

निधि का सभी प्रभागों में समान वितरण नहीं

शिकायत में कहा गया है कि घरपट्टी सर्वेक्षण के माध्यम से आम नागरिकों पर अतिरिक्त कर का बोझ डालने का प्रयास किया गया। साथ ही, कोरोना काल के मानधन कर्मचारियों के साथ असमान व्यवहार और दवाइयों की खरीदी में देरी जैसे संवेदनशील मुद्दे भी उठाए गए हैं।

आरोप है कि शासन से प्राप्त निधि का सभी प्रभागों में समान वितरण नहीं हुआ। समिति ने मांग की है कि प्रशासकीय कार्यकाल के दौरान मिले फंड, दिए गए टेके और मनपा पर बढ़े कर्ज के बोझ की पूरी जानकारी जनता के समक्ष रखी जाए।

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