Nashik: ओलावृष्टि और लू से घटा प्याज उत्पादन, लासलगांव मंडी में भाव बढ़े; निर्यात प्रतिबंध न लगाने की मांग
Nashik Onion Price Hike: ओलावृष्टि और गर्मी से प्याज की फसल बर्बाद होने के बाद लासलगांव मंडी में दाम ₹1,740 तक पहुंचे। निर्यातकों ने सरकार से अचानक प्रतिबंध न लगाने की मांग की।
- Written By: रूपम सिंह
नासिक प्याज ,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nashik Market Onion Price Hike: फरवरी-मार्च की ओलावृष्टि और उसके बाद भीषण गर्मी व लू के प्रभाव ने महाराष्ट्र के प्याज उत्पादन की कमर तोड़ दी है। रबी सीजन की पैदावार घटने और भंडारण में रखे प्याज के खराब होने से बाजार में आपूर्ति का संकट गहरा गया है। लासलगांव मंडी में प्याज की कीमतों में लगातार सुधार देखा जा रहा है, जहां भाव 1,021 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 1,740 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं।
जलवायु परिवर्तन का फसलों पर बड़ा असर
मौसम के इस मिजाज ने राज्य के 6 लाख से अधिक किसानों को प्रभावित किया है। 1 लाख 45 हजार 606 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसलें बर्बाद हुई हैं, जिसमें अकेले नासिक जिले का 18 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र शामिल है। हालांकि सरकार ने 166।36 करोड़ रुपये का राहत कोष मंजूर किया है, लेकिन निर्यातकों का मानना है कि यह किसानों के वास्तविक नुकसान की भरपाई के लिए अपर्याप्त है।
सरकार अचानक प्याज निर्यात पर प्रतिबंध न लगाए
हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (एचपीईए) ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखकर चिंता जताई है कि सरकार अचानक प्याज निर्यात पर प्रतिबंध न लगाए। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विकास सिंह ने ‘वैज्ञानिक निर्यात प्रबंधन नीति’ लागू करने की वकालत की है।
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अचानक प्रतिबंध के घातक परिणाम
- किसानों का नुकसानः निर्यात बंद होने से घरेलू बाजार में आवक बढ़ती है, जिससे कीमतें उत्पादन लागत से भी नीचे गिर जाती हैं। इससे हतोत्साहित किसान अगले सीजन में बुआई घटा देते हैं।
- प्याज की छंटाई, ग्रेडिंग और पैकिंग उद्योग में 80 प्रतिशत महिला मजदूर कार्य करती हैं। निर्यात रुकने से इनका रोजगार छिन जाता है। बार-बार प्रतिबंध लगाने से भारत की व्यापारिक विश्वसनीयता कम हो रही है, जिससे भारत के पारंपरिक ग्राहक (बांग्लादेश, श्रीलंका, खाड़ी देश) पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देशों की ओर रुख कर रहे हैं।
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सात चरणों वाली मानक संचालन प्रक्रिया की मांग
- निर्यातकों ने सरकार को सलाह दी है कि पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय इन चरणों का पालन किया जाए- बफर स्टॉक का उपयोग करना। माल ढुलाई पर सब्सिडी देना। सीमित निर्यात शुल्क लगाना।
- न्यूनतम निर्यात मूल्य या कोटा प्रणाली का उपयोग केवल राष्ट्रीय आपातकाल में ही प्रतिबंध लागू करना। प्रतिबंध से पहले कम से कम 30 दिनों का पूर्व नोटिस देना। पुराने निर्यात समझौतों को पूरा करने की अनुमति देना।
