नासिक कुंभमेला अपडेट: मंदिर संस्थानों के साथ मिलकर प्राधिकरण शुरू करेगा प्रभावी निर्माल्य प्रबंधन प्रणाली

Simhastha Kumbh 2027: सिंहस्थ कुंभमेला 2027 को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए नासिक-त्र्यंबकेश्वर प्राधिकरण निर्माल्य प्रबंधन मॉडल तैयार करेगा। इससे गोदावरी संरक्षण के साथ महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर
The Nashik-Trimbakeshwar Authority will develop a Nirmalya(floral waste) management model to make the 2027 Simhastha Kumbh Mela eco-friendly. This initiative will facilitate the conservation of the Godavari River while also creating employment opportunities for women.
शेखर सिंह, कुंभ मेला आयुक्त, डिजाइन फोटो (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Nashik Kumbh Nirmalya Management: नासिक आगामी सिंहस्थ कुंभमेला 2027 को पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभमेला प्राधिकरण ने एक सराहनीय पहल शुरू की है। इस बार कुंभमेले के दौरान पवित्र गोदावरी नदी के संरक्षण और स्वच्छता को सुनिश्चित करने के लिए मंदिर संस्थानों के सहयोग से 'निर्माल्य प्रबंधन' का एक स्थायी और ठोस मॉडल तैयार किया जाएगा। इस विषय पर चर्चा के लिए 18 जून को एक विशेष बैठक बुलाई गई है, जिसमें प्रमुख मंदिर संस्थानों के ट्रस्टी और प्रतिनिधि शामिल होंगे।

निर्माल्य से रोजगार सृजन पर जोर

प्राधिकरण ने केवल कचरा प्रबंधन ही नहीं, बल्कि 'वेस्ट टू वेल्थ' (कचरे से कंचन) की संकल्पना पर जोर दिया है पूजा के बाद बचे फूलों और अन्य सामग्रियों का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा किया जाएगा। एकत्रित किए गए निर्माल्य से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने की संभावना तलाशी जाएगी। इसके माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएंगे। मंदिर परिसरों से निर्माल्य के संग्रह, परिवहन और प्रसंस्करण के लिए एक प्रभावी प्रणाली का निर्माण किया जाएगा।

प्राधिकरण की कार्ययोजना

बैठक में बुनियादी सुविधाओं और हितधारकों के बीच समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कुंभमेला प्राधिकरण का लक्ष्य है कि मंदिर संस्थानों के सक्रिय सहयोग से एक ऐसा अनुकरणीय मॉडल तैयार किया जाए, जो न केवल गोदावरी नदी को प्रदूषण मुक्त रखे, बल्कि देश के अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी एक मिसाल बने। - कुंभमेला प्राधिकरण,आयुक्त, शेखर सिंह

सिंहस्थ कुंभमेला हमारी धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच समन्वय स्थापित करने का एक बड़ा अवसर है। श्रद्धालुओं की श्रद्धा का सम्मान करते हुए निर्माल्य का उचित प्रबंधन हमारी जिम्मेदारी है। मंदिर संस्थानों और नागरिकों के सहयोग से हम नासिक-त्र्यंबकेश्वर के लिए एक दीर्घकालिक और उपयोगी मॉडल विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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