'मै तो घर पर बैठा था, कार्यकर्ताओं ने मुझे विजयी किया', जीत के बाद गोकुल गीते बाले, दराडे को मिला कर्मो फल

Nashik Vidhan Parishad Election: नासिक विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गीते ने महायुति के नरेंद्र दराडे को करारी शिकस्त दी। जीत के बाद गीते ने कहा कि कार्यकर्ताओं की मेहनत है।
gokul gite wins nashik mlc election narendra darade defeated
गोकुल गीते का बयान (सोर्स: डिजाइन फोटो)
Published on
Updated on

Gokul Gite Wins Nashik MLC Election: नासिक विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर कर दिया है। महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को करारी शिकस्त देते हुए निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गीते ने शानदार जीत दर्ज की है। इस जीत के बाद गीते ने अपनी प्रतिक्रिया में साफ किया कि यह उनकी व्यक्तिगत जीत से ज्यादा उनके कार्यकर्ताओं के संघर्ष और मतदाताओं के विश्वास की जीत है।

गोकुल गीते ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि वह मतदान से पहले अपने घर पर बैठ गए थे। उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान राज्य के तीन वरिष्ठ मंत्री उनके घर आए थे। उन वरिष्ठ नेताओं के सम्मान में उन्होंने 9 जून को अपना व्यक्तिगत चुनाव प्रचार रोक दिया था। गीते ने कहा, मैं तो केवल घर पर बैठा था, लेकिन मेरे कार्यकर्ताओं, मित्रों और शुभचिंतकों ने रातभर मेहनत की और इस चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। उन्होंने अपनी जीत का पूरा श्रेय अपने कार्यकर्ताओं को देते हुए कहा कि जब वह घर पर थे, तब ये कार्यकर्ता जमीन पर लोगों का विश्वास जीत रहे थे।

नरेंद्र दराडे पर साधा निशाना: कर्मों का फल मिला

अपनी जीत के बाद गोकुल गीते ने महायुति के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दराडे ने पिछले आठ वर्षों में इस निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के साथ जो विश्वासघात किया, आज उन्हें उसी का परिणाम भुगतना पड़ा है। गीते के अनुसार, मतदाताओं में दराडे के खिलाफ भारी आक्रोश था, जिसे पार्टी के वरिष्ठ नेता भांप नहीं पाए और दोबारा उन्हें ही उम्मीदवारी दे दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दराडे ने पहले ही मतदाताओं के आठ साल बर्बाद कर दिए थे, और जनता अब और छह साल बर्बाद नहीं करना चाहती थी।

पारिवारिक दबाव और वैचारिक जीत

गीते ने बताया कि इस चुनाव के दौरान उनके पूरे परिवार पर, विशेषकर उनके भाई गणेश गीते पर भारी दबाव था। उनकी भाभी दीपाली गीते महायुति के कैंप में थीं, लेकिन वहां भी मतदाताओं के बीच केवल गोकुल गीते के नाम की ही चर्चा चल रही थी। गीते ने स्पष्ट किया कि भले ही कागजों पर महायुति के पास अधिक मत थे, लेकिन मतदाताओं के पास 'वैचारिक स्वतंत्रता' थी और उन्होंने एक विश्वसनीय चेहरे को चुना।

भविष्य की रणनीति और कार्यकर्ताओं का फैसला

जब गीते से पूछा गया कि क्या वह अब शिवसेना शिंदे गुट या महायुति में शामिल होंगे, तो उन्होंने बहुत ही नपा-तुला जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आगे की दिशा और किसी भी पार्टी में शामिल होने का फैसला वह अकेले नहीं, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं की सलाह से लेंगे। अब सवाल यह है कि ठीक ऐसा ही जवाब कुछ दिनों पहले ओमराजे निंबालकर ने भी मीडिया के सामने दिया था और फिर उन्होंने अचानक शिंदेसेना में जाने का ऐलान किया; ठीक इसी राह पर क्या अब गोकुल गीते भी चलेंगे और यदि ऐसा होता है, तो दराडे परिवार का क्या होगा?

फिलहाल वह अपनी जीत का आनंद अपने माता-पिता और कार्यकर्ताओं के साथ साझा करना चाहते हैं। उनकी पत्नी ने भी इस जीत को एक बड़े संघर्ष का सुखद परिणाम बताया और भावुक होते हुए कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com