डमी एडमिशन और कोचिंग साठगांठ के खिलाफ नासिक से उठी आवाज; सरकार से 3 साल के प्रतिबंध और जांच की मांग

Nashik Student Protest: नासिक के विद्यार्थी समूह ने जूनियर कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के 'डमी एडमिशन' गठजोड़ के खिलाफ मोर्चा खोला है। दोषी छात्रों पर 3 साल के प्रतिबंध की मांग की गई है।
A Nashik student group has protested against the 'dummy admission' nexus between junior colleges and coaching centers, demanding a 3-year ban on violating students.
नासिक विद्यार्थी (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Dummy Admission Maharashtra: नासिक देशभर में पेपर लीक और परीक्षाओं में बढ़ती अनियमितताओं के बीच अब महाराष्ट्र में पैर पसार चुकी 'डमी एडमिशन' (छद्म प्रवेश) और कोचिंग क्लासेस की 'टाय-अप' (गठजोड़) संस्कृति के खिलाफ बड़ा विरोध शुरू हो गया है।

नासिक के 'जीवन केशरी मराठी विद्यार्थी समूह' के समूह प्रमुख प्रसाद भालेकर ने राज्य के स्कूली शिक्षा विभाग और उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिवों (मंत्रालय, मुंबई) को एक विस्तृत और कड़ा शिकायती ज्ञापन भेजा है। इस ज्ञापन के जरिए राज्य के जूनियर कॉलेजों (11वीं-12वीं) और निजी कोचिंग संस्थानों के बीच चल रहे अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए तत्काल 'राज्य स्तरीय विशेष जांच अभियान' शुरू करने की मांग की गई है।

निजी कोचिंग क्लासेस का अनियंत्रित व्यवसायीकरण

ज्ञापन में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि राज्य में निजी कोचिंग क्लासेस का अनियंत्रित व्यवसायीकरण हो चुका है। कई बड़ी कोचिंग संस्थाओं ने या तो अपने खुद के जूनियर कॉलेज खोल लिए हैं या फिर नामचीन स्थापित कॉलेजों के साथ पर्दे के पीछे से अवैध 'टाय-अप' कर लिया है।

कागजों पर कॉलेज, प्रैक्टिकल कोचिंग में छात्र केवल बोर्ड परीक्षा की पात्रता के लिए सरकारी और मान्यता प्राप्त जूनियर कॉलेजों में औपचारिक एडमिशन लेते हैं, लेकिन वे पूरे साल कॉलेज न जाकर केवल कोचिंग क्लासेस में ही पढ़ाई करते हैं। इस डमी एडमिशन पद्धति के कारण सरकार की पारदर्शी 'केन्द्रीयकृत 11वीं ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया' की विश्वसनीयता खत्म हो रही है। छात्र नियमित कक्षाओं से गायब रहते हैं, जिससे कॉलेजों की गरिमा, नियमित शिक्षण व्यवस्था और उपस्थिति प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।

ऐसे छात्रों पर लगाया जाए 3 वर्ष का प्रतिबंध

विद्यार्थी समूह ने सरकार के सामने इस शैक्षणिक भ्रष्टाचार को रोकने के लिए 16 कड़े धोरणात्मक सुझाव और मांगे रखी है, जिसमे पूरे राज्य में बिना किसी पूर्व सूचना के कक्षा 12वीं के छात्रों की वास्तविक उपस्थिति की जांच के लिए' सरप्राइज वेरिफिकेशन ड्राइव' चलाई जाए। सभी जूनियर कॉलेजों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य की जाए और उसे ऑनलाइन ट्रैक किया जाए।

11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य हो। इसके बिना बोर्ड परीक्षा का 'हॉल टिकट' जारी न किया जाए। यदि कोई छात्र' डमी एडमिशन' या 'टाय-अप' में दोषी पाया जाता है, तो उसकी 12वीं बोर्ड परीक्षा की पात्रता और परिणाम तुरंत रद्द किए जाएं।

साथ ही, ऐसे छात्रों को अगले 3 वर्षों के लिए प्रतिबंधित किया जाए जो कॉलेज फर्जी उपस्थिति दिखाते हैं या कोचिंग के साथ अवैध करार करते हैं, उनकी मान्यता तुरंत रद्द की जाए और प्रबंधकों पर आपराधिक मामले दर्ज हों।

सरकार, छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने वाले निजी कोचिंग सेंटरों के खिलाफ सख्त धाराओं में मामले दर्ज किए जाएं। इस विषय की गंभीरता को देखते हुए इस आंदोलन और मांग पत्र की कॉपियां उचित कार्रवाई के लिए राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक और राजनीतिक पदों पर भेजी गई है।

नासिक विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य, नियमित शिक्षा प्रणाली की प्रतिष्ठा और सरकारी पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया को बचाने के लिए सरकार को इस 'कोचिंग कॉलेज नेक्सस' पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी। अगर इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो नियमित रूप से कॉलेज जाने वाले ईमानदार छात्रों के साथ यह बहुत बड़ा अन्याय होगा।

- प्रसाद भालेकर, समूह प्रमुख, जीवन केशरी मराठी विद्यार्थी समूह, नासिक

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