Nashik Water Crisis: बांधों में सिर्फ 22% जल भंडार, 176 गांवों में 182 टैंकरों से सप्लाई; पानी चोरी पर FIR
Nashik Water Crisis: नासिक के ग्रामीण इलाकों में जल संकट गहरा गया है। बांधों में केवल 22% पानी बचा है। प्रशासन ने 31 अगस्त तक पानी आरक्षित कर 176 गांवों में 182 टैंकर तैनात किए हैं।
- Written By: रूपम सिंह
नासिक बांध (फोटो- सोशल मीडिया)
Dams Water Storage Nashik: नासिक जिले के ग्रामीण और जल किल्लत वाले क्षेत्रों में स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। नागरिकों को शुद्ध और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना इस समय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस गंभीर संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन, जिला परिषद और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है और व्यापक स्तर पर युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाए जा रहे हैं।
निवासी उप जिलाधिकारी रोहित कुमार राजपूत ने जिले की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए बताया कि जल संकट की मार झेल रहे नागरिकों को राहत देने के लिए टैंकरों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में जिले के 176 गांवों और 483 बस्तियों के अंतर्गत आने वाले कुल 3 लाख 23 हजार 771 नागरिकों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 182 सरकारी और अधिग्रहित टैंकर तैनात किए गए हैं।
यह टैंकर रोजाना प्रभावित इलाकों में औसतन 382 फेरे लगा रहे हैं, ताकि हर परिवार तक पानी पहुँच सके। जलापूर्ति व्यवस्था को निर्बाध और सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासन ने अब तक कुल 77 निजी व सार्वजनिक कुओं का अधिग्रहण किया है। इनमें से 22 कुएं सीधे गांवों को पानी देने के लिए और 55 कुएं टैंकरों में पानी भरने (फिलिंग प्वॉइंट) के काम में लिए जा रहे हैं। इसके अलावा जहाँ भी आवश्यकता पड़ रही है, वहाँ बोरवेल और अन्य स्थानीय जल स्त्रोतों का भी सहारा लिया जा रहा है।
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‘अल नीनो’ प्रभाव के कारण मानसून में देरी
मौसम विभाग के अनुसार, ‘अल नीनों के प्रभाव के कारण इस बार मानसून के देर से आगमन की प्रबल संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध जल भंडार का उपयोग बेहद संयम के साथ आगामी 31 अगस्त तक करना होगा। वर्तमान में नाशिक जिले के सभी छोटे-बड़े बांधों में औसतन केवल 22 प्रतिशत जल भंडारण ही शेष बचा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने निम्नलिखित सख्त कदम उठाए हैं।
नासिक पेयजल संकट को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बांधों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। बांध क्षेत्रों और मुख्य वाहिनी लाइनों से अवैध रूप से पानी की चोरी रोकने के लिए विशेष निगरानी टीमें तैनात की गई हैं। यदि कोई भी व्यक्ति बांधों या आरक्षित जल स्रोतों से अवैध रूप से पानी खींचते या चोरी करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत आपराधिक मामला दर्ज करने के कड़े निर्देश दिए गए है। प्रशासन और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की टीमें रोजाना स्थिति की बारीकी से समीक्षा कर रही हैं ताकि जरूरत के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त टैंकरों की संख्या तुरंत बढ़ाई जा सके और नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना
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पीने का पानी आरक्षित
31 अगस्त तक का लक्ष्यः मानसून में देरी की आशंका को देखते हुए वर्तमान जल भंडार को 31 अगस्त तक सुरक्षित और संभालकर इस्तेमाल करने का नियोजन। बांधों से खेती या अन्य व्यावसायिक कार्यों के लिए पानी छोड़ने पर पूरी तरह पाबंदी, पूरा पानी पीने के लिए आरक्षित। बांध क्षेत्रों से पानी की अवैध चोरी रोकने के लिए विशेष दस्तों की गश्त, दोषियों पर सीधे दर्ज होगी एफआईआर। ग्रामीण जलापूर्ति विभाग द्वारा रोजाना तहसीलवार रिपोर्ट तैयार करना ताकि मांग बढ़ते ही नए टैंकर भेजे जा सकें।
| तहसील | प्रभावित गांव व बस्तियां | तैनात टैंकर |
|---|---|---|
| येवला | 44 गांव, 70 बस्तियां | 44 |
| नांदगांव | 38 गांव, 192 बस्तियां | 36 |
| इगतपुरी | 8 गांव, 42 बस्तियां | 21 |
| सिन्नर | 8 गांव, 71 बस्तियां | 18 |
| मालेगांव | 17 गांव, 48 बस्तियां | 17 |
| सुरगाणा | 15 गांव, 14 बस्तियां | 12 |
| चांदवड | 14 गांव, 8 बस्तियां | 11 |
| देवला | 6 गांव, 10 बस्तियां | 6 |
| त्र्यंबकेश्वर | 4 गांव, 16 बस्तियां | 6 |
| पेठ | 6 गांव, 6 बस्तियां | 6 |
| बागलाण | 2 गांव, 6 बस्तियां | 5 |
