अशोक खरात का शिरडी नेटवर्क बेनकाब; पूर्व मेयर, डिप्टी मेयर और साई संस्थान के पूर्व ट्रस्टी जांच के दायरे में

Ashok Kharat Shirdi Connection: अशोक खरात के वित्तीय नेटवर्क में शिरडी के पूर्व मेयर और साई संस्थान के पूर्व ट्रस्टी फंसे। एसआईटी ने शुरू की पूछताछ। केस का दायरा हर दिन बढ़ता जा रहा है। 
Ashok Kharat Case SIT Update
Ashok Kharat Case SIT Update (डिजाइन फोटो)
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Ashok Kharat Financial Network: नासिक के कुख्यात जालसाज अशोक खरात के काले साम्राज्य की परतें अब शिरडी तक फैल गई हैं। विशेष जांच दल (SIT) की पूछताछ में खरात ने मुंह खोलना शुरू कर दिया है, जिससे महाराष्ट्र के राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हड़कंप मच गया है। ताजा जांच में शिरडी नगर पंचायत के पूर्व मेयर, डिप्टी मेयर और एक पूर्व पार्षद का नाम सामने आया है, जिन्हें एसआईटी ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। इसके अलावा, साई संस्थान के एक पूर्व न्यासी (Trustee) भी अब पुलिस की रडार पर हैं।

शिरडी में अशोक खरात, उसकी पत्नी कल्पना खरात और पांच अन्य सहयोगियों के खिलाफ अवैध साहूकारी और जमीन धोखाधड़ी के गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस हिरासत में मौजूद आरोपी अरविंद बावके ने खरात के वित्तीय लेन-देन को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। बावके की निशानदेही पर शिरडी पुलिस ने दो क्रेडिट सोसायटियों में अशोक खरात से जुड़े सैकड़ों बेनामी खातों का पता लगाया है, जिनमें करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेन-देन पाया गया है।

फर्जी हस्ताक्षर और बेनामी खाते

जांच में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि इन सैकड़ों बैंक खातों के बारे में असली खाताधारकों को कोई जानकारी ही नहीं थी। खातों को खोलते समय संपर्क नंबर के तौर पर अशोक खरात का मोबाइल नंबर दिया गया था। पुलिस को संदेह है कि अरविंद बावके ने फर्जी हस्ताक्षर कर ये खाते खुलवाए थे ताकि हवाला और अवैध साहूकारी का पैसा यहाँ खपाया जा सके। अब कई पीड़ित सामने आकर दावा कर रहे हैं कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर ये वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं।

शिरडी के रसूखदारों से पूछताछ जारी

अशोक खरात ने शिरडी में अपना एक बड़ा 'भक्त परिवार' तैयार कर रखा था। इसी की आड़ में वह भक्तों की संपत्तियों की खरीद-बिक्री में सीधा भागीदार बन जाता था। एसआईटी ने अब तक शिरडी के दो पूर्व महापौरों के बयान दर्ज किए हैं। इसके अलावा, ईशान्येश्वर मंदिर के उपाध्यक्ष से भी कड़ी पूछताछ की गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन रसूखदारों ने जानबूझकर खरात को संरक्षण दिया था या वे भी उसकी धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं।

ED की एंट्री से बढ़ेगी बेचैनी

मुंबई के एक 5-स्टार होटल से चलने वाले हवाला रैकेट और शिरडी के इस बेनामी नेटवर्क के तार आपस में जुड़े होने के पुख्ता सबूत मिल रहे हैं। चूंकि मामला करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी फंडिंग से जुड़ा है, इसलिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी जल्द ही इस जांच को अपने हाथ में ले सकता है। यदि ईडी की औपचारिक एंट्री होती है, तो शिरडी के कई सफेदपोश नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है। फिलहाल, एसआईटी खरात के डिजिटल फुटप्रिंट्स और कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) के जरिए उसके नेटवर्क के अंतिम छोर तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।

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